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  • BRICS बनाम अमेरिका: ट्रंप इतने नाराज क्यों हैं, क्या अमेरिकी बादशाहत को है खतरा?

    वॉशिंगटन: BRICS ब्लॉक का संयुक्त नौसैनिक अभ्यास दक्षिण अफ्रीकी तट के पास शुरू हो गया है। इस अभ्यास पर अमेरिका निगाह बनाए हुए है। इसे अमेरिका की आक्रामक कूटनीति का जवाब भी माना जा रहा है। शनिवार को शुरू हुए एक हफ्ते तक चलने वाले ‘विल फॉर पीस 2026’ अभ्यास का नेतृत्व चीन कर रहा


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    By Azad Hind Desk जनवरी 13, 2026
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    वॉशिंगटन: BRICS ब्लॉक का संयुक्त नौसैनिक अभ्यास दक्षिण अफ्रीकी तट के पास शुरू हो गया है। इस अभ्यास पर अमेरिका निगाह बनाए हुए है। इसे अमेरिका की आक्रामक कूटनीति का जवाब भी माना जा रहा है। शनिवार को शुरू हुए एक हफ्ते तक चलने वाले ‘विल फॉर पीस 2026’ अभ्यास का नेतृत्व चीन कर रहा है। यह अभ्यास हिंद महासागर और अटलांटिक महासागर के मिलन बिंदु के करीब हो रहा है। हालांकि, इसमें भारत शामिल नहीं हुआ है। भारत ने BRICS नौसैनिक अभ्यास में शामिल नहीं होने को लेकर कोई बयान नहीं दिया है। लेकिन, माना जा रहा है कि भारत इस अभ्यास में शामिल होकर अमेरिका को नाराज नहीं करना चाहता है।

    BRICS को खतरा मानता है अमेरिका

    अमेरिका BRICS को एक खतरे के तौर पर देखता है। वह इस ब्लॉक को अपने लिए आर्थिक खतरा मानता है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ने ब्रिक्स की स्थापना की थी। हालांकि, बाद में इसका विस्तार किया गया और कई नए देशों की इसकी सदस्यता दिलाई गई। इनमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। अमेरिका का मानना है कि BRICS समूह अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने और एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है।

    BRICS नौसैनिक अभ्यास में कौन से देश शामिल

    BRICS नौसैनिक अभ्यास में चीन और ईरान ने डिस्ट्रॉयर भेजे हैं, वहीं रूस और संयुक्त अरब अमीरात ने कॉर्वेट भेजे और दक्षिण अफ्रीका ने एक मध्यम आकार का फ्रिगेट तैनात किया। शनिवार को उद्घाटन समारोह का नेतृत्व कर रहे चीनी अधिकारियों ने कहा कि ब्राजील, मिस्र, इंडोनेशिया और इथियोपिया पर्यवेक्षकों के रूप में अभ्यासों में शामिल हो रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका के संयुक्त कार्य बल के कमांडर कैप्टन नंडवाखुलु थॉमस थमाहा ने समारोह के दौरान कहा कि ये अभ्यास सिर्फ एक सैन्य अभ्यास से कहीं ज्यादा हैं और BRICS देशों के समूह के बीच इरादे का एक बयान हैं।

    BRICS नौसैनिक अभ्यास क्यों जरूरी हैं?

    BRICS नौसैनिक अभ्यास तब हो रहा है, जब पूरी दुनिया में तनाव बढ़ रहा है। अमेरिका की आक्रामक नीतियों ने पूरी दुनिया में हाहाकार मचाया हुआ है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले टैरिफ लगाकर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस करने की कोशिश की। बाद में वे सैन्य कार्रवाईयों के दम पर अपने विरोधियों को चुप कराने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें वेनेजुएला शामिल है। ऐसे में ब्रिक्स देश नौसैनिक अभ्यास कर अमेरिका को एक संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। ब्रिक्स देशों का मानना है कि तेजी से जटिल होते समुद्री माहौल में, इस तरह का सहयोग कोई विकल्प नहीं है, बल्कि यह जरूरी है।

    ट्रंप की धमकियों ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन

    ब्रिक्स नौसैनिक अभ्यास बढ़े हुए भू-राजनीतिक तनाव के बीच हो रहा है। यह अभ्यास उत्तरी अटलांटिक में वेनेजुएला से जुड़े एक रूसी तेल टैंकर को जब्त करने के अमेरिकी कदम के ठीक तीन दिन बाद शुरू हुआ है। अमेरिका ने आरोप लगाया था कि इस टैंकर ने प्रतिबंधों का उल्लंघन किया है। इससे पहले अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी, सिलिया फ्लोरेस को राजधानी काराकास से अगवा कर लिया गया था। ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा, कोलंबिया और ईरान जैसे देशों और डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की भी धमकी दी है।

    ट्रंप BRICS को कैसे देखते हैं?

    ट्रम्प ने कुछ BRICS सदस्यों पर “अमेरिका विरोधी” नीतियां अपनाने का आरोप लगाया है। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका के संबंध चीन और रूस के साथ खराब बने हुए हैं। वहीं, ट्रंप ने ईरान पर हमला किया है और भारत के खिलाफ कड़े टैरिफ लगाए हैं। जनवरी 2025 में पदभार संभालने के बाद, ट्रंप ने सभी BRICS सदस्यों को अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ की धमकी दी थी। ट्रंप ने पिछले साल जुलाई में कहा, “जब मैंने BRICS के इस समूह, छह देशों के बारे में सुना, तो मैंने उन पर बहुत, बहुत कड़ी चोट की। और अगर वे कभी सच में सार्थक तरीके से बनते हैं, तो यह बहुत जल्दी खत्म हो जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा, “हम कभी किसी को हमारे साथ खेल खेलने नहीं दे सकते।”

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