आरटी इंडिया के साथ इंटरव्यू में व्लादिमीर पुतिन के करीबी सर्गेई रयाबकोव ने कहा कि नई दिल्ली का मानवता पर केंद्रित नजरिया, दूसरी चीजों के अलावा इस साल की भारतीय चेयरपर्सनशिप के लिए एक लेबल है। हम सच्ची मल्टीपोलैरिटी बनाने की तरफ हैं, जहां हुक्म चलाने (हेजेमनिज्म) की कोई जगह नहीं है। रयाबकोव का यह बयान दिल्ली में हुई ब्रिक्स देशों की पहली शेरपा और सूस-शेरपा बैठक के समय आया है।
रूसी विदेश मंत्री ने भी जारी किया बयान
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की ओर से भी बयान जारी करते हुए भारत को मजबूत समर्थन की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान वैश्विक चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ भविष्य की तैयारी करने वाले मुद्दों को प्राथमिकता दे रहा है। साथ ही आतंकवाद के मुद्दे पर वैश्विक संधि के लिए रूस संयुक्त राष्ट्र में भारत के साथ मिलकर काम कर रहा है।
रूस के डिप्टी विदेश मंत्री और BRICS में रूसी शेरपा सर्गेई रयाबकोव ने संगठन के विस्तार पर कहा है कि ब्रिक्स नए सदस्यों को जोड़ने और पार्टनर्स के साथ सहयोग बढ़ाने पर फोकस कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘ब्रिक्स का दरवाजा खुला है। जो देश इस एसोसिएशन में शामिल होना चाहते हैं, वे यह जानते हैं। विस्तार होगा और कोई इसका विरोध नहीं कर रहा है।
ब्रिक्स देशों का ग्रुप क्या है
ब्रिक्स गुट साल 2006 में बना था। उस वक्त इसमें ब्राजील, रूस, इंडिया और चीन (BRIC) थे। साल 2011 में साउथ अफ्रीका ग्रुप में शामिल हुआ तो इसका नाम BRICS हो गया। इसके बाद इजिप्ट, ईरान, यूएए और इथियोपिया फुल मेंबर्स के तौर पर एसोसिएशन में शामिल हुए।
ब्रिक्स में इंडोनेशिया जनवरी, 2025 को इसमें शामिल हुआ। बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, वियतनाम, युगांडा और उज्बेकिस्तान को पार्टनर देशों का स्टेटस मिला हुआ है। ब्रिक्स लगातार अपना विस्तार करने में लगा हुआ है।













