भारत में सोने और चांदी का आयात साल 2025 में रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इससे सरकार और नीति निर्माताओं की चिंताएं बढ़ गई हैं। कीमती धातुओं की बढ़ती कीमतें देश के व्यापार घाटे को और बढ़ा सकती हैं और रुपये पर दबाव डाल सकती हैं। सरकार के पास सीमित विकल्प हैं, लेकिन आयात शुल्क बढ़ाना एक प्रमुख विकल्प के तौर पर विचाराधीन है। यानी सरकार आयात शुल्क बढ़ा सकती है। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार इसमें कमी भी कर सकती है। फिलहाल आयात शुल्क 6 फीसदी है। सरकार ने दो साल 2024 के बजट में इसमें कटौती की थी।
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क्या पड़ेगा सोना-चांदी पर असर?
अगर सरकार आयात शुल्क में कमी करती है तो सोने और चांदी की कीमत में और गिरावट देखने को मिल सकती है। ऐसा साल 2024 में हो चुका है। उस समय सरकार ने कस्टम ड्यूटी को 15% से घटाकर 6% कर दिया था। उसके बाद सोने की कीमत कुछ ही देर में 5 हजार रुपये से ज्यादा तक गिर गई थी। वहीं अगर बजट में आयात शुल्क बढ़ाने की घोषणा होती है तो इन दोनों धातुओं की कीमत में तेजी आ सकती है।
कितना बढ़ा सोना-चांदी का आयात
साल 2025 में सोने का आयात पिछले साल की तुलना में 1.6% बढ़कर 58.9 अरब डॉलर हो गया। वहीं, चांदी का आयात 44% बढ़कर 9.2 अरब डॉलर हो गया। यह तब हुआ जब सोने और चांदी की वैश्विक कीमतें अपने ऐतिहासिक उच्च स्तर पर थीं। पिछले साल, सोने और चांदी ने मिलकर भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग दसवां हिस्सा लिया। अगर कीमतें बढ़ती रहीं तो 2026 में यह हिस्सा और बढ़ सकता है।
क्यों बढ़ा सकती है सरकार कस्टम ड्यूटी?
भारत सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता और चांदी का सबसे बड़ा बाजार है। लेकिन सोने की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए यह लगभग पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। चांदी की 80% से ज्यादा जरूरतें भी आयात से पूरी होती हैं। आयात में इस भारी वृद्धि से व्यापार घाटा बढ़ा है और रुपये में कमजोरी आई है, जो हाल ही में अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था।
चांदी का इस्तेमाल उद्योगों में बहुत होता है, जैसे सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स। लेकिन सोना ज्यादातर गहनों और निवेश के लिए इस्तेमाल होता है। सरकार हमेशा से सोने की मांग को गैर-जरूरी मानती रही है और इसे विदेशी मुद्रा के लिए एक बोझ समझती है। इसी वजह से सरकार ने पहले भी आयात शुल्क बढ़ाकर इसे रोकने की कोशिशें की हैं।













