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  • CA, पुजारी और IT एक्सपर्ट… 3 राज्यों से पकड़े गए 8 साइबर स्लीपर सेल, कंबोडिया-नेपाल में बैठे हैंडलर

    नई दिल्ली: कंबोडिया और नेपाल में बैठे हैंडलरों ने ग्रेटर कैलाश के NRI डॉक्टर दंपती को ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया था। इन हैंडलरों के लिए भारत में साइबर स्लीपर सेल की तरह काम कर रहे ऽ स्कैमर को IFSO ने 3 राज्यों में छापेमारी कर अरेस्ट किया है। डॉक्टर दंपती को 17 दिन डिजिटल अरेस्ट करके


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    By Azad Hind Desk जनवरी 25, 2026
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    नई दिल्ली: कंबोडिया और नेपाल में बैठे हैंडलरों ने ग्रेटर कैलाश के NRI डॉक्टर दंपती को ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया था। इन हैंडलरों के लिए भारत में साइबर स्लीपर सेल की तरह काम कर रहे ऽ स्कैमर को IFSO ने 3 राज्यों में छापेमारी कर अरेस्ट किया है। डॉक्टर दंपती को 17 दिन डिजिटल अरेस्ट करके 14.85 करोड़ की वसूली की थी। इस पूरे नेटवर्क का डायरेक्ट लिंक कंबोडिया और नेपाल से मिला है जो वहीं से ऑपरेट हो रहा था। इस ऑपरेशन में टीम ने वडोदरा, वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, भुवनेश्वर में छापेमारी की थी। ये सिंडिकेट पैसे निकालने के लिए एडवांस्ड डिजिटल टूल्स और म्यूल बैंक अकाउंट का इस्तेमाल करता था।

    डीसीपी विनीत कुमार ने बताया कि 24 दिसंबर को डॉक्टर दंपती के पास एक अनजान नंबर से कॉल आया जिसमें कहा गया कि विक्टिम के नाम पर रजिस्टर्ड एक SIM कार्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस में पाया गया है। इसके बाद एक विडियो कॉल किया। नकली ‘CBI’ और ‘पुलिस’ अधिकारी बनकर फेक अरेस्ट वॉरंट के जरिए डराया-धमकाया। डुप्लीकेट कोर्ट ने सजा भी दी।

    टीम ने कई जगहों पर की छापेमारी

    दंपती के फिक्स्ड डिपॉजिट और शेयर इन्वेस्टमेंट के पैसे सहित फंड ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। करीब 14,84,26,954 रुपए ट्रांसफर करा लिए। इस केस में एसी एसीपी प्रेम चंद्र खंडूरी, SI राज किरण, अतुल, रमेश, HC त्रिलोक, प्रमोद, Ct दीपक, मोहित, हरकेश, बिरमपाल, बसंत और योगेंद्र को टीम में शामिल किया। स्कैम में शामिल कथित बैंक अकाउंट्स की डिटेल्स हासिल कीं। डिजिटल फुटप्रिंट्स और टेक्निकल सर्विलांस के पूरे एनालिसिस और ग्राउंड इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके टीम ने देश के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ छापे मारे।

    नतीजा तब निकला जब मेन म्यूल अकाउंट होल्डर्स में से एक वडोदरा के पटेल दिव्यांग तक पहुंचा। जिसके अकाउंट में पीड़ित के अकाउंट से सीधे 4 करोड़ रुपये निकाले गए थे। पटेल की गिरफ्तारी के बाद वडोदरा से एक और आरोपी शितोले कृतिक को भी पकड़ा। भुवनेश्वर से महावीर शर्मा जबकि अंकित मिश्रा को उसी समय वडोदरा से गिरफ्तार किया। इससे बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ। वाराणसी से अरुण कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया।

    इसके अकाउंट में 2.10 करोड़ आए थे। इसकी निशानदेही पर प्रद्युम्न तिवारी को भी वाराणसी से गिरफ्तार किया। भूपेंद्र मिश्रा और आदेश यादव को लखनऊ से गिरफ्तार किया। सभी आरोपी कंबोडिया और नेपाल से ऑपरेट हो रहे एक इंटरनैशनल साइबर सिंडिकेट के कहने पर कई अकाउंट के जरिए फ्रॉड करने वाले पैसे जमा करने, म्यूल बैंक अकाउंट खरीदने और ऑपरेट करने में मदद करते थे।

    इंटरनैशनल साइबर सिंडिकेट

    आरोपियों में पटेल दिव्यांग CA कंप्लीट कर चुका है। यह ‘फ्लोरेस्टा फाउंडेशन’ के नाम से एक NGO चलाता है। दूसरा आरोपी शितोले कृतिक न्यूजीलैंड से II में डिप्लोमा होल्डर है। तीसरा आरोपी अरुण इनकम टैक्स ऑफिस के बाहर प्राइवेट डेटा एंट्री ऑपरेटर का काम करता है। चौथा आरोपी महावीर शर्मा बीकॉम पास जबकि पांचवां आरोपी प्रद्युम्न वाराणसी के घाटो पर पुजारी का काम करता है। छठवां आरोपी अंकित मिश्रा SBI कैप सिक्योरिटीज में सेल्स एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम करता है। सातवां आरोपी भूपेंद्र MBA करने के बाद जॉब कर रहा है। आठवां आरोपी आदेश कुमार स्टूडेंट्स को ट्यूशन और प्राइवेट कोचिंग देता है।

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