• International
  • Chabahar Port: ईरान के चाबहार बंदरगाह पर टेंशन में क्यों आया अफगानिस्तान, पाकिस्तान की तो लॉटरी लग गई

    काबुल: अफगानिस्तान का तालिबान प्रशासन ईरान के चाबहार बंदरगाह को लेकर टेंशन में है। उसे डर है कि चाबहार के रास्ते व्यापार करने का उसका सपना टूट सकता है। यह घटना तब सामने आई है, जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान में तनाव चरम पर है। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के रास्ते व्यापार को बंद कर दिया है।


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 23, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    काबुल: अफगानिस्तान का तालिबान प्रशासन ईरान के चाबहार बंदरगाह को लेकर टेंशन में है। उसे डर है कि चाबहार के रास्ते व्यापार करने का उसका सपना टूट सकता है। यह घटना तब सामने आई है, जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान में तनाव चरम पर है। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के रास्ते व्यापार को बंद कर दिया है। ऐसे में चारों ओर से जमीन से घिरे अफगानिस्तान के लिए किसी दूसरे बंदरगाह को ढूंढना मुश्किल हो रहा है। इसका सीधा असर अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

    चाबहार में भारत का निवेश फंसा

    फॉरेन पॉलिसी मैगजीन के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ आर्थिक सहयोग करने वाले देशों पर लगाए गए 25% टैरिफ के नतीजों की जांच की है। इस कार्रवाई से चाबहार बंदरगाह में भारत के भविष्य के निवेश पर अनिश्चितता छा गई है। चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट के जरिए भारत, ईरान और अफगानिस्तान के साथ मध्य एशियाई देशों से व्यापार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत भारत को चाबहार बंदरगाह और संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास में लगभग $500 मिलियन का निवेश करना है, जिसमें अफगान सीमा तक सड़क और रेलवे शामिल हैं। लेकिन इस निवेश पर खतरा मंडरा रहा है।

    भारत-अफगानिस्तान संबंधों को झटका

    आर्थिक विशेषज्ञ अब्दुलझुर मोदब्बर ने कहा, “चाबहार मार्ग से व्यापार करने वाले देशों पर हाल ही में अमेरिकी प्रतिबंध बहुत आक्रामक और धमकी भरा कदम हो सकता है, जो नैतिक मानदंडों के भी खिलाफ है। इसलिए, यह इस मार्ग से व्यापार करने वाले किसी भी देश पर नकारात्मक असर डाल सकता है।” फॉरेन पॉलिसी ने इस बात पर जोर दिया कि चाबहार अभी भी भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने का नई दिल्ली का एकमात्र व्यावहारिक मार्ग है। मैगजीन ने लिखा तालिबान शासन के तहत अफगानिस्तान में अपेक्षाकृत स्थिरता रही है और वह भारत के साथ अपने संबंध बढ़ा रहा है, जो भारत की क्षेत्रीय रणनीति में चाबहार के महत्व को और रेखांकित करता है।

    अफगानिस्तान के लिए दूर हुए वैश्विक बाजार

    एक अन्य आर्थिक विशेषज्ञ सैर कुरैशी ने कहा: “अफगानिस्तान के लिए, यह चुनौती वैश्विक बाजारों तक पहुंच को और अधिक कठिन और महंगा बनाती है, और कुल मिलाकर, हम कह सकते हैं कि राजनीतिक दबाव से निवेश में कमी आएगी और क्षेत्रीय व्यापार कमजोर होगा।” इस बीच, इस्लामिक अमीरात के अर्थव्यवस्था मंत्रालय ने भी घोषणा की है कि चाबहार बंदरगाह अफगानिस्तान के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और उसने अमेरिकी सरकार से बंदरगाह को क्षेत्रीय भू-राजनीतिक दबावों और प्रतिस्पर्धा से मुक्त रखने का आग्रह किया है ताकि देश का व्यापार मार्ग और आर्थिक विकास बाधित न हो।

    पाकिस्तान खुश क्यों है

    चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी प्रतिबंध से पाकिस्तान को बिना कुछ किए बड़ी कूटनीतिक बढ़त मिल गई है। एक तरफ ईरान के चाबहार में भारत के निवेश की योजना नाकाम हो गई है। वहीं, दूसरी ओर अफगानिस्तान का पाकिस्तान को छोड़कर चाबहार के रास्ते व्यापार करने का प्लान फेल हो गया है। भारत और अफगानिस्तान के बीच सीधे व्यापार का रास्ता भी बंद हो गया है। ऐसे में पाकिस्तान को लगता है कि भारत और अफगानिस्तान को उस पर निर्भर होना ही होगा।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।