मॉक्सी के मुताबिक, Confer ओपन-सोर्स AI असिस्टेंट है, यानी इसका पूरा कोड सबके लिए खुला है और कोई भी देख सकता है कि यह कैसे काम करता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें यूजर की बातचीत एंड-टु-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित रहती है। Confer में लॉगिन पासवर्ड से नहीं, बल्कि PassKey से होता है। सर्वर के पास इस PassKey की कॉपी नहीं होती। इसका मतलब यह कि कंपनी खुद आपकी चैट नहीं पढ़ सकती। हैकर, पुलिस या सरकार की किसी एजेंसी तक भी यह डेटा नहीं पहुंच सकता है।
सर्वर पर भी डेटा सुरक्षित
आमतौर पर सर्वर ऐडमिनिस्ट्रेटर सब कुछ देख सकते हैं, लेकिन Confer में ऐसा नहीं है। दावा किया गया है कि इसमें एक खास तकनीक इस्तेमाल हुई है जिसे ट्रस्टेड एग्जिक्यूशन एनवायरमेंट (TEE) कहते हैं। सरल तरीके से अगर इसे समझना हो तो यह एक ऐसा कमरा है, जिसके अंदर कोई ताकझांक नहीं कर सकता है।
Signal जैसा अनुभव, चैट भी रहेगी सेफ
Signal की तरह Confer में भी आपकी डिजिटल पहचान यानी ईमेल, IP एड्रेस से आपको जोड़ा नहीं जाता है। चैट कई डिवाइसेज पर सिंक हो सकती है, लेकिन बिना प्राइवेसी खोए। मॉक्सी का दावा है कि कई लोगों ने Confer पर खुलकर ऐसी बातें शेयर की हैं, जो वे ChatGPT जैसे प्लैटफॉर्म पर कभी नहीं करते, क्योंकि वहां उन्हें डर लगता है कि डेटा लीक न हो जाए।
बड़े AI प्लैटफॉर्म्स के लिए चुनौती
फिलहाल गूगल, OpenAI या माइक्रोसॉफ्ट जैसे बड़े AI प्लैटफॉर्म एंड-टु-एंड एन्क्रिप्शन नहीं दे रहे हैं और भविष्य में भी ऐसे किसी अपडेट के संकेत नहीं हैं। इन कंपनियों के पास कई कानूनी और बिजनेस कारण हैं, जिनकी वजह से यूजर डेटा पूरी तरह निजी नहीं रह पाता है। एक्सपर्ट मान रहे हैं कि Confer जैसे मॉडल्स के मार्केट में आने के बाद इन कंपनियों पर भी दबाव बन सकता है।














