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  • China News: चीन 2030 तक 1000 J-20 लड़ाकू विमान उड़ाएगा, खत्म होगा अमेरिकी दबदबा, भारत पर क्या असर?

    लंदन: ब्रिटेन के एक थिंक टैंक ने दावा किया है कि 2030 तक चीन J-20 लड़ाकू विमान के लगभग 1000 यूनिट्स का संचालन कर सकता है। यह दक्षिणी और पूर्वी चीन सागर के आसपास अमेरिका और उसके सहयोगियों की हवाई शक्ति को चुनौती दे सकता है। लंदन स्थित रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (RUSI) की इस


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    By Azad Hind Desk जनवरी 23, 2026
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    लंदन: ब्रिटेन के एक थिंक टैंक ने दावा किया है कि 2030 तक चीन J-20 लड़ाकू विमान के लगभग 1000 यूनिट्स का संचालन कर सकता है। यह दक्षिणी और पूर्वी चीन सागर के आसपास अमेरिका और उसके सहयोगियों की हवाई शक्ति को चुनौती दे सकता है। लंदन स्थित रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (RUSI) की इस महीने की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ने पिछले पांच वर्षों में पश्चिमी हवाई शक्ति का मुकाबला करने की क्षमता में “नाटकीय वृद्धि” की है। इसमें आधुनिक और अत्यधिक सक्षम चौथी और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का उत्पादन शामिल है।

    लगातार बढ़ रही चीनी लड़ाकू विमानों की संख्या

    साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने कहा कि 2020 में चीनी वायु शक्ति पर जारी किए गए RUSI की रिपोर्ट में बताया गया था कि पीपल्स लिबरेशन आर्मी एयरफोर्स उस समय लगभग 50 J-20 लड़ाकू विमानों का संचालन कर रही थी। 2025 के मध्य में RUSI की रिपोर्ट में बताया गया था कि चीनी वायुसेना ने सिर्फ पांच साल में 300 J-20 लड़ाकू विमानों को ऑपरेट कर रही है। RUSI के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में J-16 लड़ाकू विमानों की संख्या भी 2020 में लगभग 90-100 यूनिट से बढ़कर 2025 के अंत तक लगभग 450 हो गई है। J-16 चीन का 4.5 पीढ़ी का लड़ाकू विमान है।

    120 विमान प्रति वर्ष बना रहा चीन

    थिंक टैंक की रिपोर्ट में कहा गया है, “ये आंकड़े यह संकेत देते हैं कि चीनी वायुसेना द्वारा संचालित पांचवीं पीढ़ी और उन्नत चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का अनुपात 2020 से बहुत बढ़ गया है और भविष्य में भी ऐसा ही होता रहेगा।” रिपोर्ट में कहा गया है कि अपग्रेडेड और अत्याधुनिक तकनीक से लैस J-20A और ट्विन-सीट J-20S वेरिएंट की उत्पादन दर लगभग 120 विमान प्रति वर्ष तक पहुंच गई है। उसने आगे कहा, “यह प्रवृत्ति बताती है कि 2030 तक चीनी वायुसेना के पास लगभग 1,000 J-20/A/S और 900 J-16 विमान सेवा में होंगे।”

    J-35 लड़ाकू विमान भी बना रहा चीन

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की राय में, “चीन की उन्नत चौथी और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान में यह असाधारण रूप से तेज वृद्धि शायद पर्याप्त नहीं है।” इसमें आगे कहा गया है, “हर साल बनाए जा रहे लगभग 120 J-20A/S स्टील्थ फाइटर जेट के अलावा, छोटा J-35/A अब चीनी वायुसेना के लिए जमीन पर इस्तेमाल के लिए खरीदा जा रहा है, साथ ही चीनी नौसेना के लिए इसकी नौसैनिक भूमिका भी है।”

    J-20 चीन का पहला पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट

    J-20 चीन का पहला पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट है। यह 2017 में सर्विस में शामिल किया गया था। इसका अपग्रेडेड J-20A वेरिएंट पिछले सितंबर में बीजिंग की मिलिट्री परेड के दौरान पेश किया गया था। यह लड़ाकू विमान स्वदेशी तौर पर विकसित WS-15 इंजन से लैस है। 1000 J-20 लड़ाकू विमान चीन को पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट की संख्या के मामले में अमेरिका के करीब ला देंगे।

    अमेरिका के पास कितने पांचवीं पीढ़ी के विमान?

    अमेरिका लगभग 600 F-35 लड़ाकू विमान का संचालन करता है, जिनमें से लगभग 400 उसकी वायु सेना के पास हैं। अमेरिका ने कथित तौर पर 2040 के दशक तक 1,700 से अधिक पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान ऑपरेट करने की योजना बनाई है। अमेरिका इसके अलावा 187 F-22 लड़ाकू विमानों को भी ऑपरेट करता है, जो पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हैं। अमेरिका ने किसी भी देश को F-22 लड़ाकू विमान नहीं बेचा है।

    भारत की हवाई ताकत कितनी है?

    भारत और चीन में पुराना सीमा विवाद है। दोनों देश 1962 में युद्ध भी लड़ चुके हैं। इसके अलावा सीमा पर तनातनी लगातार जारी है। ऐसे में भारत भी अपनी सैन्य ताकत को बढ़ा रहा है। लेकिन, संख्या के मामले में चीन के सामने भारत की सैन्य ताकत काफी कम है। भारतीय वायुसेना वर्तमान में लगभग 29 से 31 लड़ाकू स्क्वाड्रनों का संचालन कर रही है। एक स्क्वाड्रन में आमतौर पर 16 से 18 विमान होते हैं। अनुमानित रूप से भारत के पास 500 से 660 के बीच सक्रिय लड़ाकू विमान हैं। हालांकि, स्वीकृत शक्ति 42 स्क्वाड्रन की है, जिसे 2035 तक प्राप्त करने का लक्ष्य है।

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