अमेरिका ने पिछले दो महीने में दो विदेशी सरकारों को खत्म किया है। दोनों सरकारें अमेरिका की दुश्मन थीं और बड़े तेल भंडार की देखरेख भी करती थीं। वेनेजुएला के निकोलस मादुरो न्यूयॉर्क में ट्रॉयल का इंतजार कर रहे हैं, वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई मर चुके हैं। असल में अमेरिकी कानून में ऐसी किसी भी हत्या में अमेरिका के शामिल होने पर प्रतिबंध है। लेकिन, 9/11 के बाद से, जिसके बाद कांग्रेस ने राष्ट्रपतियों को आतंकवाद से लड़ने के लिए बल प्रयोग करने का व्यापक अधिकार दिया, इस कानून को कमजोर कर दिया है। इसका फायदा बाद की सरकारें खूब उठा रही हैं।
सद्दाम हुसैन
सद्दाम हुसैन (1937–2006) इराक के पांचवें राष्ट्रपति थे, जिन्होंने 1979 से 2003 तक लगभग 24 वर्षों तक देश पर शासन किया। अमेरिका ने उनके शासनकाल के दौरान इराक के पास समूहिक विनाश के हथियार (WMD) होने का आरोप लगाया और हमला कर दिया। उन्हें 13 दिसंबर 2003 को अमेरिकी सेना ने “ऑपरेशन रेड डॉन” के तहत एक गड्ढे से पकड़ा था। बाद में अमेरिका के इशारे पर चलने वाली इराक की कठपुतली अदालत ने सद्दाम हुसैन को 1982 के दुजैल नरसंहार (148 शियाओं की हत्या) के लिए मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी पाया। उन्हें 30 दिसंबर 2006 को बगदाद में फांसी दे दी गई।
मुअम्मर गद्दाफी
मुअम्मर गद्दाफी लीबिया के एक सैन्य अधिकारी और राजनेता थे। उन्होंने 1969 से 2011 तक 42 वर्षों तक लीबिया पर शासन किया। मात्र 27 साल की उम्र में, एक युवा सेना अधिकारी के रूप में उन्होंने किंग इदरीस के खिलाफ एक रक्तहीन विद्रोह का नेतृत्व किया और सत्ता हथिया ली। गद्दाफी पर मानवाधिकारों के उल्लंघन, विपक्षियों को बेरहमी से कुचलने और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को फाइनेंस करने के आरोप लगे। 2011 में लीबिया में अमेरिका के समर्थन से उनके खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन और विद्रोह शुरू हुआ। 20 अक्टूबर 2011 को सिरते शहर में नाटो समर्थित विद्रोहियों ने उन्हें पकड़ लिया और उनकी हत्या कर दी। इन विद्रोहियों को अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने गद्दाफी की मौजूदगी की सूचना दी थी।
न्गो दिन्ह दीम
न्गो दिन्ह दीम वियतनाम युद्ध के शुरुआती दौर में दक्षिण वियतनाम के पहले राष्ट्रपति थे। एक कट्टर साम्यवाद-विरोधी और कैथोलिक नेता, उन्हें अमेरिका का समर्थन प्राप्त था। उनकी दमनकारी नीतियों, विशेषकर बौद्धों के साथ भेदभाव, के कारण अलोकप्रिय होने पर अमेरिकी सीआईए के समर्थन से नवंबर 1963 में एक सैन्य तख्तापलट में उनकी हत्या कर दी गई।
सल्वाडोर अलेंदे
सल्वाडोर अलेंदे चिली के एक प्रमुख राजनेता और 29वें राष्ट्रपति थे। वे राष्ट्रपति के रूप में चुने जाने वाले लातिन अमेरिका के पहले मार्क्सवादी नेता थे। अमेरिका उन्हें अपना दुश्मन मानता था। ऐसे में सीआईए ने उनके खिलाफ तख्तापलट की साजिश रची और 11 सितंबर 1973 को जनरल अगस्तो पिनोशे के नेतृत्व में चिली की सेना ने एक हिंसक सैन्य तख्तापलट के जरिए उन्हें सत्ता से हटा दिया। इसी हमले के दौरान राष्ट्रपति भवन में उनकी मृत्यु हो गई।













