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  • CJI सूर्यकांत ने क्यों कहा हैरान हूं…कहा-पिछड़ा वर्ग में कितने मुसलमान आंकड़े दीजिए, जमकर सुनाया

    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट पसमांदा मुस्लिमों को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) कैटेगरी में शामिल करने की याचिका का परीक्षण करने पर राजी हो गया है। याचिका में पसमांदा मुसलमानों को शिक्षा और नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण की बात कही गई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर हैरानी भी जताई कि ऐसी डिमांड


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    By Azad Hind Desk फरवरी 24, 2026
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    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट पसमांदा मुस्लिमों को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) कैटेगरी में शामिल करने की याचिका का परीक्षण करने पर राजी हो गया है। याचिका में पसमांदा मुसलमानों को शिक्षा और नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण की बात कही गई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर हैरानी भी जताई कि ऐसी डिमांड दूसरे गरीब मुसलमानों के लिए क्यों नहीं की गई है?

    पिछड़ा वर्ग से कितने मुसलमान हैं, कोई आंकड़ा है

    द टेलीग्राफ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को पसमांदा मुसलमानों के लिए ओबीसी आरक्षण की मांग की अर्जी याचिकाकर्ता मोहम्मद वसीम सैफी ने दी थी।
    उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश सीनियर एडवोकेट अंजना प्रकाश से मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने सख्त लहजे में पूछा कि दूसरे गरीब मुसलमानों की कीमत पर आप शायद खुद को (पसमांदा) प्रमोट करना चाहते हैं? कोई आंकड़ा है कि पिछड़ा वर्ग से असल में कितने मुसलमान हैं?

    ओबीसी: सामाजिक के अलावा आर्थिक फैक्टर भी है

    याचिकाकर्ता ने जवाब दिया कि पसमांदा मुसलमान समुदाय के भीतर सबसे ज्यादा सामाजिक और आर्थिक रूस से पिछड़े हैं। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा-ओबीसी केवल एक सोशल स्टेटस फैक्टर नहीं है…इकनॉमिक स्टेटस भी एक फैक्टर है।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा-पसमांदा के आंकड़े लेकर आएं

    पीठ ने याचिकाकर्ता से यह भी कहा कि आप अपनी बात के समर्थन और दलील के लिए पर्याप्त आंकड़े लेकर आएं, जिससे यह साबित हो सके कि पसमांदा मुसलमान आरक्षण का फायदा उठाने के लायक हों। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में 4 हफ्ते बाद सुनवाई करेगा।

    5 जजों की बेंच इस मामले में करेगी सुनवाई

    • एडवोकेट अंजना प्रकाश ने कोर्ट से यह अपील करते हुए कि इस मामले को 2025 में आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से दायर याचिका के साथ टैग कर दिया जाए।
    • आंध्र सरकार ने हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ याचिका दी है, जिसमें राज्य सरकार के मुस्लिमों के लिए 4 फीसदी आरक्षण को रद्द कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को विचार के लिए 5 जजो की संवैधानिक पीठ के समक्ष भेज दिया।

    कौन हैं पसमांदा मुसलमान, जिनके लिए आरक्षण की मांग

    • पसमांदा फारसी शब्द है, जिसका मतलब है ‘जो पीछे छूट गया है’। इसे आमतौर पर मुसलमानों में वंचित तबकों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
    • पसमांदा मुसलमान शब्द का पहला इस्तेमाल 1998 में अली अनवर अंसारी ने किया था, जिन्होंने पसमांदा मुस्लिम महाज की स्थापना की थी।
    • उस वक्त पसमांदा को दलितों में शामिल किया गया था, मगर सभी पसमांदा दलित नहीं होते हैं। वो ओबीसी और अनुसूचित जातियों में भी हो सकते हैं।

    भारत में कितने हैं पसमांदा मुसलमान, दावे अलग-अलग

    • शंकरआईएएसपार्लियामेंट पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, 2004-05 में सच्चर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में ओबीसी, एससी-एसटी मुसलमानों की संख्या करीब 40 फीसदी बताई थी।
    • हालांकि, पसमांदा लोगों का दावा है पसमांदा की आबादी भारत में कुल मुस्लिम आबादी का 80-85 फीसदी है। हालांकि, अब ये आंकड़े भी काफी पुराने हो चुके हैं।
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