हालांकि भारत के दखल के बाद 24 घंटे में इस दंपति को बचा लिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक ध्रुव और दीपिका 30 जनवरी को नई दिल्ली के एक होटल में रुके थे और फिर 1 फरवरी को उन्होंने अजरबैजान एयरलाइंस की फ्लाइट से दिल्ली से बाकू के लिए उड़ान भरी। लेकिन उनकी यात्रा वहीं रुक गई क्योंकि कथित तौर पर कुछ अज्ञात लोगों ने उनका अपहरण कर लिया और एक सुनसान घर में ले गए।
ध्रुव और दीपिका ने अपहरण को लेकर क्या बताया
ध्रुव और दीपिका ने बताया है कि अपहरणकर्ताओं ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए परिवार के सदस्यों से संपर्क किया और उन्हें बताया कि वो पैसे नहीं देने पर ध्रुव को और टॉर्चर करेंगे। उन्होंने पैसे की मांग की और उन दोनों की किडनी बेचने की धमकी दी। परिवार के सदस्यों ने भारत में स्थानीय राजनेताओं से संपर्क किया और ‘ऑपरेशन महिसागर’ नाम से राजनयिक हस्तक्षेप के जरिए दोनों को बचाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक ये दोनों एजेंट्स के जरिए ह्यूमर ट्रैफिकिंग गिरोह के हत्थे चढ़ गये थे। ध्रुव और दीपिका गुजरात के रहने वाले हैं और एजेंट्स ने इनसे लाखों रुपये के बदले डंकी रूट से अमेरिका पहुंचाने का वादा किया था। इस रास्ते में अजरबैजान, कनाडा और मैक्सिको जैसे देश पड़ते हैं। इन दोनों से 1-2 करोड़ रुपये मांगे गये थे।
काफी सख्ती के बाद भी डंकी रूट पर लगाम नहीं लग रहा है। पिछले साल, ‘डंकी रूट’ के माध्यम से अमेरिका में प्रवेश करने वाले 54 लोगों को भारत निर्वासित किया गया था। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में छोटी-मोटी नौकरियों जैसे खाना पकाने जैसे नौकरी के लिए उन्होंने लाखों रुपये एजेंट को दिए, लेकिन अमेरिका पहुंचने के साथ ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और भारत वापस भेजे जाने से पहले उन्हें कई साल जेल में बिताने पड़े। उनमें से किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि अमेरिका उन्हें कैसे भेजा जाएगा। इसमें कई महीने लगे और उन्हें बसों, नावों, जंगलों से होकर पैदल यात्रा के जरिए अमेरिका भेजा गया था।













