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  • Dulla Bhatti Lohri Katha : दुल्ला भट्टी कौन हैं? लोहड़ी पर गाए जाते हैं इनके गीत, असली नाम भट्टी नहीं अब्दुल्ला खान

    लोहड़ी के त्योहार का बहुत खास महत्व होता है, जो मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है। इस पर्व को सूर्य के उत्तरायण होने की खुशी में मनाया जाता है। इसी तिथि से दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। लोहड़ी को कृषि से जुड़ा त्योहार माना जाता है। वहीं, पौराणिक


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    By Azad Hind Desk जनवरी 13, 2026
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    लोहड़ी के त्योहार का बहुत खास महत्व होता है, जो मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है। इस पर्व को सूर्य के उत्तरायण होने की खुशी में मनाया जाता है। इसी तिथि से दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। लोहड़ी को कृषि से जुड़ा त्योहार माना जाता है। वहीं, पौराणिक कथाओं के अनुसार इसका संबंध भगवान कृष्ण और राक्षसी लोहिता की कथा से माना गया है। इसके अलावा, पंजाब में लोहड़ी को दुल्ला भट्टी की कथा से जुड़ा माना जाता है। इस दिन इन्हीं के गीत भी गाए जाते हैं। इनका असली नाम दुल्ला भट्टी नहीं बल्कि अबदुल्ला खान है, जिनकी कथा के बिना इस त्योहार को अधूरा माना जाता है। तो आइए विस्तार से जानते हैं लोहड़ी पर दुल्ला भट्टी की कथा…

    कौन थे दुल्ला भट्टी, असली नाम अब्दुल्ला खान
    माना जाता है कि दुल्ला भट्टी का जन्म 1547 में पाकिस्तान के पंजाब में पिंडी भट्टियां में हुआ था। वह अपने समय में राय अब्दुल्ला खान रॉबिन हुड थे और इनका मुगलों के साथ वैर रहता था। मुगल बादशाह हुमायूं ने दुल्ला भट्टी के पिता व दादा की मृत्यु करवाई थी। दुल्ला भट्टी मुगलों के सिपाही, जमींदार और अमीरों से धन छीनकर गरीबों व जरूरतमंदों में बांट दिया करते थे। यही कारण है कि गरीब इन्हें अपना मसीहा मानते थे। मुगलों से वैर होने और गरीबों की मदद करने के चलते ही उनका दुल्ला भट्टी पड़ा था। हालांकि, लोहड़ी के साथ दुल्ला भट्टी के जुड़ने की एक अलग कथा है।

    दुल्ला भट्टी की कथा, सुंदर दास नामक एक किसान था जिसकी दो सुंदर बेटियां थीं। उनका नाम सुंदरी और मुंदरी था। किसान की पुत्रियों पर वहां के नंबरदार की नीयत ठीक नहीं थी। वह इन दोनों बहनों से विवाह करने की इच्छा रखता था। लेकिन सुंदरदास अपनी पुत्रियों की शादी अपनी पसंद के अनुसार करना चाहता था। एक बार नंबरदार से डरकर सुंदर दास ने अपने सारी परेशानी दुल्ला भाटी से जाकर बताई। इसके पश्चात, दुल्ला भट्टी ने लोहड़ी के दिन नंबरदार के खेतों में आग लगा दी थी और सुंदरी मुंदरी के भाई बनकर उनका विवाह करवा दिया। इसी के याद में लोहड़ी की अग्नि प्रज्वलित की जाती है।

    लोहड़ी पर दुल्ला भट्टी, सुंदरी और मुंदरी की कथा भी सुनी जाती है। साथ ही, उनके लोग गीत भी लोगों द्वारा गाया जाता है जिसमें दुल्ला भट्टी को याद करते हैं। कहा जाता है कि बादशाह अकबर को जब दुल्ला भट्टी ने पकड़ा था तब उन्होंने अपने आप को भांड बताकर अपनी जान की रक्षा की थी। गलत के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने वाले दुल्ला भट्टी को अकबर ने धोखे से पकड़वाया था। इसके बाद, आनन फानन में उन्हें फांसी दे दी गई थी। लेकिन वो आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।

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