एक सूत्र ने बताया कि मीटिंग में एक सरकारी प्रतिनिधि ने इस समिति के गठन का प्रस्ताव दिया था। इसमें कई क्षेत्रों और सरकारी विभागों के एक्सपर्ट शामिल होंगे। ईपीएफओ अभी अप्रैल 2015 के नोटिफिकेशन के मुताबिक निवेश करता है। इसमें 45 से 65 फीसदी निवेश गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में जाता है जबकि 20 से 25 फीसदी आवंटन कॉरपोरेट डेट पेपर्स में जाता है। केवल 5% तक पूंजी शॉर्ट-टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाने की इजाजत है। इससे इंडेक्स फंड्स के जरिए 5 से 15% फंड इक्विटीज के लिए रह जाता है।
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इनकम बढ़ाने पर काम
अधिकारियों का कहना है कि 31 दिसंबर के आंकड़ों के मुताबिक ईपीएफओ ने अपने कॉर्पस का करीब 88% हिस्सा सरकारी बॉन्ड्स में और 10.6% हिस्सा इक्विटीज में लगा रखा है। प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों के लिए पीएफ एक अनिवार्य सरकारी बचत योजना है। इसमें कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी का 12% हिस्सा कंट्रीब्यूट करता है जबकि कंपनी भी इतना हो योगदान देती है। एम्प्लॉयर के कंट्रीब्यूशन में से 8.33% कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाता है। ईपीएफ अकाउंट में जमा रकम पर ब्याज मिलता है।
सूत्रों ने बताया कि मीटिंग में कंसल्टेंट क्रिसिल ने रेयर अर्थ्स, रेलवे और डिफेंस जैसे एमर्जिंग और सनराइज सेक्टर्स में निवेश की व्यावहारिकता पर एक प्रस्तुति दी और यील्ड की संभावनाओं के बारे में बताया। ईपीएफओ अपने सदस्यों की इनकम बढ़ाने पर काम कर रहा है। संगठन अगले महीने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए ब्याज दर की घोषणा करेगा। पिछले साल आरबीआई ने ईपीएफओ को अपना इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट और अकाउंटिंग प्रैक्टिसेज सुधारने के लिए कई सुझाव दिए थे।













