यूरोप के लिए खतरा बना ‘पाकिस्तान’
CNN-News18 की रिपोर्ट के अनुसार, फिनिश आकलन रिपोर्ट, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस के सार्वजनिक रूप से पाकिस्तानी मूल के चरमपंथी नेटवर्कों के दक्षिण एशिया और यूरोप दोनों को प्रभावित करने वाले आतंकी गठजोड़ में शामिल होने के दावे के बाद आई है। पिछले कुछ वर्षों में, जर्मनी और नीदरलैंड सहित कई यूरोपीय देशों ने आधिकारिक बयानों, खुफिया आकलन और अदालती कार्यवाही में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तानी आतंकवादी समूहों से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं का बार-बार जिक्र किया गया है।
इस्लामी जिहाद का खतरा बढ़ा
फिनलैंड की सेना के खुफिया आकलन में कहा गया है कि इस्लामी जिहाद कम नहीं हुआ है, बल्कि इसने खुद को ढाल लिया है। इस रिपोर्ट में कट्टरपंथी इस्लामी समूहों को सिर्फ आतंकवादी संगठनों के रूप में नहीं, बल्कि हाइब्रिड युद्ध संरचनाओं के अभिन्न घटकों के रूप में बताया गया है। फिनलैंड की खुफिया एजेंसियों का कहना है कि ये नेटवर्क साइबर अपराध, प्रॉक्सी हिंसा, अस्वीकार्य असामयिक कार्य और राजनीतिक हेरफेर जैसी अवैध गतिविधियों में शामिल हैं।
पाकिस्तानी इस्लामी जिहाद का भारत निशाना
इस रिपोर्ट में पाकिस्तान को इस खतरनाक इकोसिस्टम के हब के रूप में पहचाना गया है। रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि खतरा सिर्फ छिटपुट आतंकवादी हमलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक अस्थिरता का कारण भी बन सकती है। पाकिस्तान में पैदा होने और फलने-फूलने वाले आतंकी संगठनों का भले ही प्राथमिक लक्ष्य भारत हो, लेकिन इससे यूरोप और बाकी दुनिया अछूती नहीं है। फिनिश इंटेलिजेंस का आकलन है कि इन आतंकवादी समूहों का इस्तेमाल पाकिस्तानी हैंडलर्स भारत के खिलाफ अपने उद्दश्यों को पूरा करने के लिए करते हैं।














