आप डेंटिस्ट की पढ़ाई कर रही थीं। डॉक्टर बनते-बनते ऐक्टर कैसे बन गई़ं?
मेरे पापा को फिल्मों का बहुत क्रेज है तो मैंने भी बचपन से ही खूब बॉलिवुड फिल्में देखी हैं। हमारे घर पर एक मिनी थिएटर था, जो अभी भी है। हमारे घर पर हर शुक्रवार को फिल्मों की स्क्रीनिंग होती थी। जब मैं बोर होती थी तो भी कोई ना कोई डीवीडी चला लेती थी तो जाने-अनजाने में सिनेमा के साथ मेरा रिश्ता बचपन से था। ऐक्टिंग की शुरुआत भी पापा के कहने से ही हुई। मैं डेंटिस्ट की फर्स्ट ईयर की पढ़ाई कर रही थी। ब्रेक चल रहा था। पापा ने बोला कि उनके कोई दोस्त फिल्म बना रहे हैं, तुम ऑडिशन देने जाओगी?
वश और फिर उसकी हिंदी रीमेक शैतान में आपकी भूमिका बहुत ही डिमांडिंग है। उसे निभाना कितना चुनौतीपूर्ण रहा?
मुश्किल तो निश्चित तौर पर था। मुझे एक ही किरदार दूसरी बार निभाना था। पहली बार तो मुझे भी अहसास नहीं था कि फिल्म कैसी बन रही है। मुझे याद है कि जब हम शूट कर रहे थे तो एक बार 10-15 दिन का ब्रेक मिला था और मैं काफी अपसेट थी कि यार, सब अच्छा जा रहा है, मेरा लिंक टूट जाएगा लेकिन दूसरे-तीसरे दिन मुझे बॉडी में बहुत थकान महसूस हुई।
‘मर्दानी 3’ की दुनिया भी काफी स्याह है। गर्ल चाइल्ड ट्रैफिकिंग जैसी घटनाओं के बारे में पढ़कर-सुनकर क्या प्रतिक्रिया होती है?
गुस्सा आता है, डर लगता है। जब भी हम ऐसा कुछ पढ़ते या सुनते हैं, रूह कांप जाती है क्योंकि कई बार लड़कियों संग बहुत ही भयावह घटनाएं होती हैं। इसलिए, जरूरी है कि हम स्ट्रॉन्ग रहें। मर्दानी उदाहरण है कि आज के दौर में औरत कैसी होनी चाहिए। मुझे लगता है कि आज की पीढ़ी की लड़कियां बहुत स्ट्रॉन्ग हैं। वे ऐसी कोई सिचुएशन आई तो अपने लिए खड़ी रहेंगी।
वैसे आज की पीढ़ी यानी जेन Z के लिए ऐसा भी कहा जाता है कि वे अपने काम/जॉब आदि के लोग गंभीर नहीं हैं। आपकी इस पर क्या राय है?
दरअसल, जेन Z से पहले की जो पीढ़ी है, वो इतनी सीरियस रह चुकी है कि उनको लगता है कि जेन Z सीरियस नहीं है। लेकिन यह वो पीढ़ी है, जो अपनी जिंदगी खुशी-खुशी जी रही है, जैसा कि आपको जीना चाहिए। जेन Z युद्ध या झगड़ों में नहीं मानते।
आपको और मर्दानी की स्टार रानी मुखर्जी को एक ही साल में नैशनल अवॉर्ड मिला। जब यह पता चला तो सेट पर कैसा माहौल था? रानी से पहली मुलाकात कैसी रही?
जब नैशनल अवॉर्ड अनाउंस हुआ था तो हम आधी फिल्म शूट कर चुके थे। उसके बाद जब हम सेट पर मिले तो एक छोटा सा जश्न भी मनाया। एक-दूसरे को बधाई दी। यह बहुत ही बड़ी बात थी हम दोनों एक ही फिल्म कर रहे थे और हम दोनों को एक ही साल में नैशनल अवॉर्ड मिला। यह बहुत ही खास पल था। इसके बाद उन्होंने मेरी फिल्म वश देखी, जो उन्हें बहुत पसंद आई। वैसे, हमारी पहली मुलाकात तो रीडिंग के दौरान ही हो गई थी। असल जिंदगी में भी वह मुझे अपने किरदार शिवानी जैसी ही लगीं। प्रेरणादायी, उत्साही, मजबूत, उनसे मिलकर एक प्रेरणा मिली। फिर उनके साथ पहली बार स्क्रीन शेयर करके बहुत मजा आया था। मैंने बचपन से उन्हें अलग-अलग करैक्टर निभाते हुए देखा था तो उनके साथ काम करना यादगार रहा।














