• Entertainment
  • Exclusive: फरीदा जलाल को हो रही सलीम खान की फिक्र! रमजान में रख रहीं रोजा, कहा- यह उसूलों पर चलना सिखाता है

    दुआओं और इबादत का पाक महीना रमजान शुरू हो चुका है। इस महीने में रोजे और इबादत से सवाब कमाने वालों में हिंदी सिनेमा की प्यारी-दुलारी, मां-दादी की भूमिकाओं को जीवंत करने वाली वरिष्ठ अदाकारा फरीदा जलाल भी शामिल हैं। 76 साल की फरीदा इन दिनों विशाल भारद्वाज की फिल्‍म ‘ओ रोमियो’ में भी नजर


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk फरवरी 20, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    दुआओं और इबादत का पाक महीना रमजान शुरू हो चुका है। इस महीने में रोजे और इबादत से सवाब कमाने वालों में हिंदी सिनेमा की प्यारी-दुलारी, मां-दादी की भूमिकाओं को जीवंत करने वाली वरिष्ठ अदाकारा फरीदा जलाल भी शामिल हैं। 76 साल की फरीदा इन दिनों विशाल भारद्वाज की फिल्‍म ‘ओ रोमियो’ में भी नजर आ रही हैं। नवभारत टाइम्‍स से खास बातचीत में फरीदा जलाल, रमजान के महीने, परिवार के रोजा रखने और उम्र के इस पड़ाव पर रमजान की रीत को निभाने की चुनौतियों पर खुलकर राय रखती हैं। वह बताती हैं कि डॉक्‍टर उनसे रोजा नहीं रखने को कहते हैं, लेकिन उनसे जितना हो पाता है, वह करती हैं। बात सलीम खान भी छ‍िड़ी, जो इन दिनों माइनर ब्रेन हेमरेज के बाद अस्‍पताल में भर्ती हैं। सलीम-जावेद ने ‘मजबूर’ फिल्‍म में फरीदा को कास्‍ट किया था। वह कहती हैं, ‘मुझे उनकी फिक्र हो रही है और मैं उनसे मिलने अस्पताल जाना चाह रही हूं।’

    फरीदा जलाल बताती हैं, ‘हमारे घर में तो सभी रोजा हैं। रमजान बरकतों का महीना होता है। खुशियों का महीना होता है। मुझे लगता है कि रोजे भी जरूरी हैं। खुद पर एक कंट्रोल करना, जिंदगी में लकीर खींचना, अपने उसूलों पर चलना, गुस्से पर कंट्रोल करना, प्यार ही प्यार बांटना, सबकी मदद करना, रमजान का महीना यह सब हमें सिखाता है।’

    ‘डॉक्‍टर कहते हैं रोजा मत रख‍िए’

    जब उनसे पूछा गया कि क्‍या 76 साल की उम्र इसमें आड़े नहीं आती? यह पूछने पर वह जवाब देती हैं, ‘कभी-कभी मुश्किल होती है। डॉक्टर भी बोलते हैं कि आप रोजा मत रखिए, तो कभी-कभी हम नहीं भी रखते हैं, लेकिन जितना हो सके उतने रोजे रखते हैं।’

    मुझे उनकी फिक्र हो रही है और मैं उनसे मिलने अस्पताल जाना चाह रही हूं। मैं आज-कल में ही उनसे मिलने जाने का सोच रही हूं।
    फरीदा जलाल, दिग्‍गज एक्‍ट्रेस

    सलीम साहब से मिलने जाऊंगी

    फरीदा जलाल को सलीम-जावेद की लिखी फिल्म ‘मजबूर’ के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला था। लेखक सलीम खान का माइनर ब्रेन हेमरेज हुआ, ज‍िसके बाद से वह अस्पताल में भर्ती हैं। इस पर वह कहती हैं, ‘मैंने आज ही उनकी तबीयत का सुना है। मुझे उनकी फिक्र हो रही है और मैं उनसे मिलने अस्पताल जाना चाह रही हूं। मैं आज-कल में ही उनसे मिलने जाने का सोच रही हूं। सलीम-जावेद ने ‘मजबूर’ की स्क्रिप्ट बहुत ही बढ़िया लिखी थी, जिसमें मेरा रोल भी बहुत बढ़िया था।’

    ‘ओ रोम‍ियो’ में फरीदा जलाल के मुंह से अपशब्‍द सुन मचा शोर

    हिंदी सिनेमा में पिछले पांच दशक से पहले बहन, फिर मां और अब दादी जैसे रिश्तों में अपनायित भरने वाली अदाकारा फरीदा जलाल ‘ओ रोमियो‘ में शाहिद कपूर की दादी बनी हैं। इस बार वह पर्दे पर अपनी छवि से इतर पहली बार गाली देते नजर आईं। इस पर लोग जहां काफी हैरत में हैं, वहीं फरीदा जलाल का कहना है कि असल में लोग पूरा डायलॉग सही से सुने बिना सिर्फ गाली पर अटक गए हैं। फिल्‍म में एक सीन है, जहां वह शाहिद कपूर से कहती हैं, ‘इश्क में आशिक अगर तर जाए तो रोमियो, अगर मर जाए तो चू***’।’

    मुझे बिल्कुल नहीं मालूम था कि इतना बवाल हो जाएगा। लोगों का ये रिएक्शन होगा, लेकिन मुझे इस बात की बेइंतहा खुशी है कि मैं अपनी वो साख, वो छवि बनाकर इतने साल चल सकी कि मैं कुछ लकीरें पार नहीं करूंगी। अपने हदूद (दायरे) में रहूंगी।
    फरीदा जलाल, दिग्‍गज एक्‍ट्रेस

    ‘मैंने कभी अपनी हद और लकीर पार नहीं की’

    इस डायलॉग को लेकर छिड़ी चर्चा पर फरीदा जलाल कहती हैं, ‘मुझे बिल्कुल नहीं मालूम था कि इतना बवाल हो जाएगा। लोगों का ये रिएक्शन होगा, लेकिन मुझे इस बात की बेइंतहा खुशी है कि मैं अपनी वो साख, वो छवि बनाकर इतने साल चल सकी कि मैं कुछ लकीरें पार नहीं करूंगी। अपने हदूद (दायरे) में रहूंगी। इसमें भी आप देखें तो मैं अपने पोते को बता रही हूं कि तुम्हारे दादा जी ने ये बोला था। मेरा किरदार गाली नहीं दे रहा है, मगर यह बात कोई गौर से सुन ही नहीं रहा है।’

    विशाल भाद्वाज ने मुझसे सबसे पहला सवाल यही पूछा- फरीदा जी आप गाली देंगी ना? सोचो, मेरा क्या हाल हुआ होगा? (हंसती हैं) मैं इंतजार कर रही हूं कि ये इंसान आए और मुझे फिल्म ऑफर करे और फिर जब फिल्म ऑफर हुई तो आते ही उन्होंने ये बात कही।
    फरीदा जलाल, एक्‍ट्रेस

    ‘विशाल जी का पहला सवाल था- आप गाली देंगी ना?’

    अपने रोल और सीन के ऑफर के दौरान के रिएक्शन के बारे में फरीदा जलाल कहती हैं, ‘मुझे निर्माता-निर्देशक साजिद नाडियाडवाला से बहुत प्यार है, मगर उन्होंने मुझे कभी अपनी फिल्म में नहीं लिया तो मुझे हमेशा उनसे शिकायत रही कि वह मेरे लिए क्यों नहीं सोचते? मुझे क्यों नहीं लिया?, फिर विशाल भारद्वाज के साथ काम करना तो हर किसी का ख्वाब होता है। यह हर एक्टर की विशलिस्ट में होता है और मेरी ये ख्वाहिश तब पूरी हुई जब मुकेश छाबड़ा उनको मेरे घर लेकर आए, मगर विशाल जी ने मुझसे सबसे पहला सवाल यही पूछा- ‘फरीदा जी आप गाली देंगी ना?’ सोचो, मेरा क्या हाल हुआ होगा? (हंसती हैं) मैं इंतजार कर रही हूं कि ये इंसान आए और मुझे फिल्म ऑफर करे और फिर जब फिल्म ऑफर हुई तो आते ही उन्होंने ये बात कही।’

    अब मैं क्या करती? जाने देती विशाल जी को? बिल्कुल नहीं, मैंने उनसे पूछा कि गंदी-गंदी गाली तो नहीं होंगी ना, तो उन्होंने कहा कि नहीं-नहीं, छोटी-छोटी होंगी, क्योंकि गुस्से वाली दादी है। मैंने कहा- ठीक है सर, छोटी-छोटी गाली दूंगी, पर पूरी फिल्म में कहीं कोई गाली नहीं है। उस डायलॉग में भी वो उसके दादा की बात बता रही है।
    फरीदा जलाल, एक्‍ट्रेस

    फरीदा जलाल बोलीं- मैं छोटी छोटी गाली दूंगी

    फरीदा जलाल आगे बताती हैं, ‘अब मैं क्या करती? जाने देती विशाल जी को? बिल्कुल नहीं, मैंने उनसे पूछा कि गंदी-गंदी गाली तो नहीं होंगी ना, तो उन्होंने कहा कि नहीं-नहीं, छोटी-छोटी होंगी, क्योंकि गुस्से वाली दादी है। मैंने कहा- ठीक है सर, छोटी-छोटी गाली दूंगी, पर पूरी फिल्म में कहीं कोई गाली नहीं है। उस डायलॉग में भी वो उसके दादा की बात बता रही है। दूसरी लाइन तो आप लोग सुन ही नहीं रहे हो, गाली गाली कह रहे हो।’

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।