सऊदी अरब के राज परिवार के करीबी एनालिस्ट अली शिहाबी ने समाचार एजेंसी AFP को बताया है कि “परमाणु इस डील का एक अहम हिस्सा है और पाकिस्तान को याद है कि किंगडम ने प्रभावी रूप से उनके परमाणु कार्यक्रम को फाइनेंस किया था और जब उन पर प्रतिबंध लगाए गए थे, तब उनका समर्थन किया था।” 8 जनवरी को रॉयटर्स ने दो अज्ञात सूत्रों का हवाला देते हुए बताया था कि पाकिस्तान और सऊदी अरब एक डील पर काम कर रहे हैं, जिसके तहत JF-17 फाइटर जेट का सौदा हो सकता है।
क्या सऊदी अरब वाकई JF-17 फाइटर जेट चाहता है?
चीन के चेंगदू और पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स ने मिलकर JF-17 को बनाया है, जो एक हल्का फाइटर जेट है। ये रूसी डिजाइन वाले RD-93 टर्बोफैन इंजन से चलता है। इसके दो बार अपग्रेड किया गया है और इसके ब्लॉक 2 और ब्लॉक 3 वेरिएंट बनाए गये हैं। ब्लॉक-3 को पाकिस्तान बेचने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के अलावा, यह जेट अभी म्यांमार, नाइजीरिया और अजरबैजान जैसे देश इस्तेमाल करते हैं। इस बीच पाकिस्तान ने कहा है कि लीबिया ने दिसंबर 2025 में JF-17 का ऑर्डर दिया था और बांग्लादेश अभी इसे खरीदने पर विचार कर रहा है। रॉयटर्स की एक और रिपोर्ट का दावा है कि सूडान भी इसे खरीदने पर विचार कर सकता है। हालांकि JF-17 खरीदने वाले ये सभी देश काफी गरीब हैं और उनका रक्षा बजट काफी मामूली है, लेकिन सऊदी अरब के साथ ऐसी बात नहीं है।
सऊदी अरब का रक्षा बजट काफी बड़ा है। सऊदी का साल 2025 का रक्षा बजट 78 अरब डॉलर था और वो दुनिया में हथियारों पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाले देशों में पांचवें स्थान पर है। रॉयल सऊदी एयर फोर्स के पास पहले से ही लड़ाकू जेट्स का एक शानदार बेड़ा है। उसके पास अमेरिकी F-15SA और यूरोफाइटर टाइफून 4.5th-जेनरेशन मल्टी-रोल फाइटर है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पिछले साल जब वाइट हाउस का दौरा किया था, तो उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप से एफ-35 स्टील्थ जेट खरीदने के लिए बात की थी। इसीलिए पाकिस्तानी JF-17, जिसमें सबसे ज्यादा एडवांस मिसाइल PL-15 ही लग सकता है, वो सऊदी के बाकी लड़ाकू विमानों के मुकाबले कहीं नहीं ठहरता, इसीलिए सवाल उठ रहे हैं कि क्या वाकई सऊदी पाकिस्तानी जेट चाहता है या पाकिस्तान, झूठी कहानियां फैला रहा है? या फिर क्या सऊदी अरब एफ-35 को नहीं खरीदकर अमेरिका को झटका देना चाहता है?
क्या F-35 को JF-17 के साथ उड़ाने की इजाजत देगा अमेरिका?
JF-17 में चीनी टेक्नोलॉजी है और इसीलिए सवाल ये है कि क्या अमेरिका, सऊदी के अपने एफ-35 के साथ पाकिस्तानी-चीनी JF-17 उड़ाने की इजाजत देगा? अमेरिका ने तुर्की को रूसी एस-400 खरीदने की वजह से एफ-35 प्रोग्राम से बाहर कर दिया था। इसीलिए अगर सऊदी, पाकिस्तानी JF-17 खरीदने की कोशिश करता है तो अमेरिका उसे एफ-35 बेचने से इनकार कर देगा, ये सौ फीसदी सच है। अमेरिका पहले ही UAE को चीनी टेक्नोलॉजी की वजह से एफ-35 देने से इनकार कर चुका है। इसीलिए एक्सपर्ट्स का मानना है कि सऊदी अरब, JF-17 थंडर के लिए अपने “F-35 सपने” को खतरे में नहीं डालेगा!













