क्रेमलिन ने क्या कहा
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति पुतिन को कूटनीतिक माध्यमों से इस बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का ऑफर मिला है। हम अभी इस प्रस्ताव का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “हम सभी विषयों पर स्पष्टता के लिए अमेरिकी पक्ष से संपर्क करने की उम्मीद करते हैं।”
ऐसा कहा जा रहा है कि यह परिषद शांति योजना के दूसरे चरण के दौरान काम करना शुरू कर देगी। पहला चरण संपन्न हो चुका है, जिसके लिए अक्टूबर 2025 में इजरायल और हमास के बीच मिस्र, कतर, अमेरिका और तुर्की ने मध्यस्थता की थी। यूक्रेन पर हमले के बाद से रूस को पश्चिम देशों ने डिप्लोमैटिक तौर पर काफी हद तक अलग-थलग कर दिया है।
गाजा पीस बोर्ड का काम क्या होगा
बोर्ड ऑफ पीस, गाजा के लिए एक ‘अम्ब्रेला ओवरसाइट बॉडी’ के तौर पर काम करेगा और जिसकी अध्यक्षता ट्रंप करेंगे, उसमें विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होंगे। मिडिल ईस्ट और दुनिया भर के कई देशों के नेताओं को इसके लिए न्योता भेजा गया है। भारत भी इसमें शामिल है। रॉयटर्स ने एक खत और ड्राफ्ट चार्टर की एक कॉपी के हवाले से कहा है कि बोर्ड की अध्यक्षता ट्रंप जीवन भर करेंगे। यह गाजा संघर्ष को सुलझाने से शुरू होगा और फिर दूसरे संघर्षों से निपटने के लिए इसका विस्तार किया जाएगा।
तीन साल का होगा सदस्य देशों का कार्यकाल
खत में कहा गया है कि सदस्य देशों का कार्यकाल तीन साल तक सीमित होगा और स्थायी सदस्यता हासिल करने के लिए कथित तौर पर 1 बिलियन डॉलर का भुगतान करना होगा। राजनयिकों की चेतावनी है कि यह योजना संयुक्त राष्ट्र के काम को नुकसान पहुंचा सकती है।
भानुमति का पिटारा बना गाजा बोर्ड ऑफ पीस
ट्रंप ने गाजा बोर्ड ऑफ पीस में अधिकतर उन देशों का शामिल किया है, जिनके संबंध इजरायल के साथ अच्छे नहीं हैं। इजरायल ने भी ट्रंप के इस प्रस्ताव का विरोध किया है। ट्रंप ने इसमें तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान को न्योता दिया है। ये तीनों देश इजरायल का खुलेआम विरोध और हमास का समर्थन करते हैं। इसके अलावा ट्रंप ने रूस को भी आमंत्रित कर दिया है। ऐसे में इसमें परस्पर विरोधी विचारधारा वाले देश शामिल होने से यह भानुमति का पिटारा बन गया है।












