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  • ​Gen Z ​ ने अमिताभ को बताया ‘बागबान’ का रियल विलन, दलीलें सुन समीर सोनी बोले- 20 साल बाद राहत मिली

    अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी की फिल्म ‘बागबान’ की फैन्स के दिलों में खास जगह है। रवि चोपड़ा की 2003 में आई इस पारिवारिक ड्रामा फिल्म को लोगों ने खूब पसंद किया। इस फिल्म की कहानी चार बच्चों के पैरेंट्स की मार्मिक की कहानी है, जिनका उनके बच्चे उपेक्षा करते हैं। जिन पैरेंट्स ने अपने


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk फरवरी 10, 2026
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    अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी की फिल्म ‘बागबान’ की फैन्स के दिलों में खास जगह है। रवि चोपड़ा की 2003 में आई इस पारिवारिक ड्रामा फिल्म को लोगों ने खूब पसंद किया। इस फिल्म की कहानी चार बच्चों के पैरेंट्स की मार्मिक की कहानी है, जिनका उनके बच्चे उपेक्षा करते हैं। जिन पैरेंट्स ने अपने बच्चों को पालने के लिए पूरी जिंदगी लगा दी उन्हें अब उनके ही बच्चे बोझ मानने लगे हैं। ऐसे में माता-पिता एक-दूसरे से अलग, अपनी पारी के हिसाब से बच्चों के साथ जीवन गुजारने पर मजबूर दिखते हैं। इस फिल्म में अमिताभ का आखिरी डायलॉग युवा पीढ़ी को लताड़ने की वजह से खूब पॉप्युलर रहा।

    अब दो दशक बाद दर्शक फिल्म की कहानी को और अधिक समकालीन और आलोचनात्मक नजरिए से देख रहे हैं। इस फिल्म में समीर सोनी, जिन्होंने राज (अमिताभ बच्चन) और पूजा मल्होत्रा (हेमा मालिनी) के दूसरे बेटे संजय मल्होत्रा का किरदार निभाया था, ने हाल ही में एक रील इंस्टाग्राम पर शेयर किया। यहीं से फिल्म की कहानी को लोगों ने एक अलग नजरिए से देखना शुरू किया।

    समीर सोनी ने लिखा- आखिरकार 20 साल बाद कुछ राहत मिली

    समीर सोनी ने जो वीडियो शेयर किया है वो किसी Gen-Z कंटेंट क्रिएटर ने बनाया है। अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर रील शेयर करते हुए समीर सोनी ने व्यंग्य और बदलते दौर की सराहना करते हुए लिखा, ‘आखिरकार 20 साल बाद कुछ राहत मिली। नई पीढ़ी से मुझे बेहद प्यार है।’

    ‘बागबान’ की कहानी की नैतिकता पर सवाल उठा रही

    वीडियो में ये क्रिएटर ‘बागबान’ की कहानी की नैतिकता पर सवाल उठा रही हैं और समीर सोनी के किरदार को सही ठहरा रही हैं। वीडियो में वो कहती हैं, ‘ब्रो ये बंदा बागबान में ग्रीन फ्लैग की तरह है। लेकिन भाई इसको इतना विलन दिखाया है, जो अपनी वाइफ की बातें सुनता है, टाइम पर आता है और टाइम पे जाता है, इसको डिनर करवाता है, इसको इसकी एनिवर्सरी याद रहती है और ये लड़का इंटेलेक्चुअल है क्योंकि इसने इसके पापा को कहा कि पापा आपको कोई एफडी, कोई पीपीएफ नहीं की है या फिर आपने कोई सेविंग्स क्यों नहीं की। पीछे से बहुत ज्यादा इमोशनल सॉन्ग लगा दिया गया। अपने बेटे को बना दिया विलन।’

    फिल्म में अमिताभ की सेविंग्स पर भी सवाल

    वो अमिताभ के किरदार के लिए आगे कहती है, ‘ब्रो, आपका बेटा ज्यादा बोल नहीं रहा है, उसने सही कहा है कि आपके पास कोई सेविंग्स क्यों नहीं है लाइफ में। ऐसा भी नहीं है कि आप बहुत बुरे जगह पर काम करते थे। आप एक रेप्युटेड बैंक में काम करते थे।’ फिर वो कहती हैं- आगे देखो।

    समीर सोनी की पत्नी के किरदार का भी दिखाया दूसरा पक्ष

    ‘ये लड़की एकदम सही है। रात के 1 बजे तुम खिटर-पिटर करोगे, ये ऑफिस जाती है, इसको तो सोने में डिस्टर्बेंस होगा ही न। तुमको समझना चाहिए और इसने सही कहा है कि अपने कमरे में खिटर-पिटर करो, क्यों ड्राइंग रूम में..जबकि इनका रूम पास ही है। इसने काफी अच्छे से बोला और इसको इतना बुरा लग गया। ये बुरे तरीके से बोलता भी नहीं है, वो कहता है कि मेरी बीवी सुबह उठती है, हमारे लिए खाना बनाती है, फिर भी आपको इतना शोर करके उठाना है, उसको रेस्ट चाहिए।’

    टाइपराइटर पर खटर-खटर आवाज करने पर भी सुनाई बात

    वो कहती हैं, ‘बचपन में इसे इतना विलन की तरह देखा था न..लेकिन अभी आप अगर बड़े होकर देखोगे… जो काम करने जाते हैं उनको ये विलन की तरह नहीं लेगगी। बतौर रिटायर्ड पर्सन, आप कुछ भी करो, आपके पास सुबह बहुत टाइम होता है खटपट करने के लिए, आप तब करो या फिर.. उनके नाती या पोते ने कहा था- मेरे लैपटॉप पर कर लो लेकिन नहीं, इनको तो टाइपराइटर पर खटर खटर आवाज ही करना है।’ इसके साथ ही फिल्म के कई सीन पर वो सवाल खड़ी करती नजर आती है।

    लोगों ने किया सपोर्ट, कहा- हम बच्चों को जिस अपराधबोध से गुजरना पड़ा वो बहुत था

    अब इस वीडियो पर भारी संख्या में लोग क्रिएटर के पक्ष में नजर आ रहे हैं। एक ने कहा है, ‘बिल्कुल सही कहा आपने।’ एक ने कहा- बागबान को लेकर मेरा नजरिया बदल गया, मैं टीम चिल्ड्रन में हूं। एक और ने कहा- सच में! इस फिल्म के रिलीज होने पर हम बच्चों को जिस तरह के अपराधबोध से गुजरना पड़ा, वह तो हद से ज्यादा था! इस फिल्म में सलमान खान अमिताभ के गोद लिए बेटे के रूप में नजर आए थे।

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