एमसीएक्स पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी की कीमतों में शुरुआती कारोबार में लगभग 10,000 रुपये प्रति किलो की तेजी देखी गई। वहीं, सोने के फरवरी वायदा में 2,000 रुपये प्रति 10 ग्राम का इजाफा हुआ। एमसीएक्स पर चांदी के वायदा भाव 4.18% बढ़कर 2,46,198 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गए। वहीं सोने के फरवरी वायदा में 1.5% की बढ़ोतरी हुई और यह 1,37,795 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव के कारण निवेशक सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं में पैसा लगा रहे थे।
वेनेजुएला पर अमेरिकी एक्शन के बाद क्या भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे, सोने-चांदी पर कैसे असर होगा?
भू-राजनीतिक अनिश्चितता का असर
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़े जाने के बाद सोने और चांदी की तेजी और बढ़ गई। इस घटना ने दुनिया भर में राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ा दी और लोग सुरक्षित निवेश की तलाश में कीमती धातुओं की ओर भागे।
जब दुनिया भर के निवेशक कीमती धातुओं में निवेश कर रहे थे, तब सोने और चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में लगातार बढ़ती रहीं। स्पॉट चांदी 4.5% बढ़कर 75.86 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई, जबकि स्पॉट सोने में 1.5% की तेजी आई और यह 4,395.35 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। यह पिछले एक हफ्ते का सबसे ऊंचा स्तर था। अमेरिका में सोने के फरवरी वायदा में 1.8% की बढ़ोतरी हुई और यह 4,405.40 डॉलर पर पहुंच गया।
2025 में शानदार प्रदर्शन के बाद तेजी
यह तेजी 2025 में सोने और चांदी के शानदार प्रदर्शन के बाद आई है। साल 2025 में चांदी की कीमतों में लगभग 147% का उछाल आया था और सोने में करीब 65% की बढ़ोतरी हुई थी। यह साल 1979 के बाद से उनकी सबसे बड़ी वार्षिक बढ़त थी।
ट्रंप का बयान और तेल आपूर्ति की चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात की पुष्टि की कि वाशिंगटन तब तक वेनेजुएला को अस्थायी रूप से चलाएगा जब तक कि वहां एक उचित राजनीतिक बदलाव नहीं हो जाता। इस बयान ने सुरक्षित निवेश की मांग को और बढ़ा दिया। इस सैन्य कार्रवाई से देश के नेतृत्व और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यह अनिश्चितता निकट भविष्य में सोने-चांदी के बाजारों को प्रभावित करती रहेगी।
इस कारण भी बढ़ रही कीमत
साल 2026 में कम से कम दो बार अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें भी सोने-चांदी की कीमतों को बढ़ा रही हैं। चांदी की आपूर्ति में संरचनात्मक कमी भी एक बड़ा कारण है, खासकर तब जब चीन ने परिष्कृत चांदी के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। चीन वैश्विक चांदी आपूर्ति का लगभग 60-70% हिस्सा प्रदान करता है और वहां किसी भी तरह की रुकावट से बाजार में पहले से ही तंग आपूर्ति और भी कस सकती है।












