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  • Google Maps… डूबता हुआ स्टार्टअप कैसे कमाने लगा ₹1000000000000? गूगल मैप्स के जन्मदिन पर जानें खास बातें

    नई दिल्ली: गलियों और सड़कों पर हमें राह दिखाने वाला गूगल मैप्स ( Google Maps ) आज 21 साल का हो गया है। 8 फरवरी 2005 को इसकी शुरुआत हुई थी। इसकी नींव लार्स (Lars) और जेन्स रासमुसेन (Jens Rasmussen) नाम के दो भाइयों ने रखी थी। इन दोनों भाइयों का यह स्टार्टअप कुछ खास


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    By Azad Hind Desk फरवरी 8, 2026
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    नई दिल्ली: गलियों और सड़कों पर हमें राह दिखाने वाला गूगल मैप्स ( Google Maps ) आज 21 साल का हो गया है। 8 फरवरी 2005 को इसकी शुरुआत हुई थी। इसकी नींव लार्स (Lars) और जेन्स रासमुसेन (Jens Rasmussen) नाम के दो भाइयों ने रखी थी। इन दोनों भाइयों का यह स्टार्टअप कुछ खास नहीं चला और डूबने लगा। गूगल की शुरुआत करने वाले लैरी पेज इसे बचाने के लिए आए और उनकी कंपनी गूगल ने इसे खरीदकर वेब ब्राउजर के लिए विकसित किया और गूगल मैप्स नाम दिया। शुरुआत में यह सिर्फ डेस्कटॉप प्रोग्राम था, लेकिन सैटेलाइट तकनीक से इसने नेविगेशन का तरीका हमेशा के लिए बदल दिया। आज ये हमारी जिंदगी का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।
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    ऑस्ट्रेलिया की कंपनी ने किया था शुरू

    उस समय MapQuest का जमाना था। हमें बस दिशाओं के साथ चौकोर नक्शे मिलते थे। तभी ऑस्ट्रेलिया की एक स्टार्टअप कंपनी Where2 ने सोचा कि नक्शे को ही स्क्रीन के बीच में रखा जाए। लोग नक्शे को इधर-उधर खिसका कर खुद देख सकते थे कि वे कहां हैं। आज यह बात बहुत सीधी लगती है, लेकिन तब किसी को यह पसंद नहीं आया।

    Sequoia Capital ने Where2 में निवेश किया था। लेकिन बाद उसने अपना पैसा वापस खींच लिया, जिससे Where2 को रातों-रात फंडिंग मिलनी बंद हो गई। ऐसा करते हुए, उन्होंने लैरी पेज को Where2 के फाउंडर्स से मिलवाया। Where2 की टेक्नोलॉजी पहले Expedition नाम के एक डेस्कटॉप ऐप के तौर पर शुरू हुई थी। इसे डाउनलोड करना पड़ता था, लेकिन लैरी पेज को यह पसंद नहीं आया। उन्होंने कहा, ‘हमें वेब पसंद है’ और उनके ऐप को ब्राउजर में बदलने के लिए एक समय-सीमा तय कर दी।

    लॉन्चिंग से एक दिन पहले हो गया था लीक

    यूजर्स तक आसानी से पहुंचाने के लिए इसमें कई बदलाव किए गए। 7 फरवरी 2005 को Google Maps आधिकारिक लॉन्च से एक दिन पहले ही लीक हो गया। लोग ड्रैग होने वाले नक्शों और डिजाइन को देखकर बहुत हैरान थे। लेकिन शुरुआती एक करोड़ व्यूज के बाद इसका इस्तेमाल कम हो गया।

    ऐसे बदल गई दुनिया

    बाद में गूगल ने धीरे-धीरे इसके डेवलपर टूल्स जारी किए और एक ऐसा फीचर लॉन्च किया जिससे लोग गूगल मैप्स में अपना घर देख सकते हैं। गूगल मैप्स का यह फीचर जबरदस्त हिट हुआ। एक साल बाद साल 2006 में Google Maps दुनिया का सबसे बड़ा मैप प्रोवाइडर बन गया। आज गूगल मैप्स स्मार्टफोन पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले ऐप में से एक है।

    कितना रेवेन्यू और कैसे होती है कमाई?

    आज गूगल मैप्स पैरेंटिंग कंपनी अल्फाबेट का मुख्य टूल है। हर साल इसके रेवेन्यू में इजाफा हो रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2019 में जहां इसका रेवेन्यू 3 अरब अमेरिकी डॉलर था, वहीं साल 2023 तक यह बढ़कर करीब 11.1 अरब अमेरिकी डॉलर (एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) हो गया। यह दिखाता है कि लोग अब गूगल मैप्स को सिर्फ रास्ता बताने वाले ऐप से कहीं ज्यादा मानते हैं। यह लोकेशन-आधारित सेवाओं के लिए भी एक बड़ा प्लेटफॉर्म बन गया है। गूगल मैप्स इस तरह से अपनी कमाई करता है:

    • गूगल मैप्स पर कई तरह के विज्ञापन दिखाए जाते हैं और डेवलपर्स को प्रीमियम API इस्तेमाल करने के लिए पैसे देने पड़ते हैं। गूगल मैप्स की कुल कमाई का कम से कम 82% हिस्सा विज्ञापनों से आता है।
    • गूगल मैप्स का बड़ा रेवेन्यू नेविगेशन से आता है। गूगल मैप नेविगेशन का इस्तेमाल करके बिजनेस करने वालों से गूगल पैसे लेता है। Google Map पर अपने स्टोर, रेस्तरां या सर्विस सेंटर को बढ़ावा देने के लिए कंपनियां गूगल को पेमेंट करती हैं।
    • ‘प्रमोटेड पिन’ और पर्सनलाइज्ड विज्ञापन के जरिए भी गूगल मैप्स कमाई करता है। उदाहरण के लिए, अगर आपको गूगल मैप पर सर्च करना है ‘बेस्ट कॉफी शॉप नियर मी’ तो Google Maps पहले प्रमोशनल रेस्तरां को दिखाता है। इसके लिए यह कंपनियों से पैसे लेता है।

    टॉप 3 में शामिल है यह ऐप

    गूगल मैप्स जुलाई 2024 में दुनिया भर में सबसे ज्यादा डाउनलोड किए जाने वाले गूगल ऐप्स में तीसरे नंबर पर रहा। इसे लगभग 1.20 करोड़ बार डाउनलोड किया गया। साल 2023 में गूगल मैप्स अमेरिका में सबसे ज्यादा डाउनलोड किया जाने वाला नेविगेशन ऐप था। इसे एक करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया गया, जबकि दूसरे नंबर पर Waze रहा, जिसे 98.9 लाख बार डाउनलोड किया गया।

    कई प्लेटफॉर्म से मिल रही टक्कर

    डिजिटल मैपिंग सेक्टर में आज गूगल मैप्स का मुकाबला करने के लिए कई प्लेटफॉर्म मैदान में हैं। इनमें Waze, Apple Maps, HERE WeGo, OpenStreetMap, TomTom, Mapbox, MapQuest, MapmyIndia/Mappls प्रमुख हैं। इनमें Waze गूगल के स्वामित्व में है, लेकिन स्वतंत्र रूप से काम करता है। यह वास्तविक समय में लोगों द्वारा एकत्र किए गए ट्रैफिक डेटा, अलर्ट आदि जानकारी देने वाला प्रमुख ऐप है। भारत में काफी लोग गूगल मैप के अलावा मैपमाईइंडिया का भी इस्तेमाल करते हैं।

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