ट्रंप ने दिए नरमी के संकेत
सोमवार को जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वे ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए सैन्य शक्ति का प्रयोग करेंगे। इस पर ट्रंप ने बस इतना ही कहा, “नो कमेंट्स।” ट्रंप के इस बदले-बदले व्यवहार को देख हर कोई हैरान हो गया, क्योंकि इससे पहले अपने हर बयान ने उन्होंने ताकत के दम पर कब्जा करने की चेतावनी दी थी। उन्होंने यूरोप के लिए सलाह देते हुए कहा, “ग्रीनलैंड पर नहीं, रूस और यूक्रेन के साथ युद्ध पर ध्यान केंद्रित करें…।” उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स को यह भी बताया कि सैन्य शक्ति का प्रयोग करने की संभावना “आवश्यक नहीं होगी।”
ग्रीनलैंड पर हमला नहीं करेगा अमेरिका
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भी ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप से बात की है। इससे बाद स्टारमर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ग्रीनलैंड पर जबरन कब्जा करने के लिए सेना का इस्तेमाल करने के बारे में गंभीर नहीं हैं। हालांकि, ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जे को अमेरिकी सुरक्षा के लिए जरूरी बता चुके हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी ग्रीनलैंड में सैन्य कार्रवाई का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि ट्रंप डेनमार्क से इस क्षेत्र को खरीदने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई का विकल्प टाला
इससे पता चलता है कि ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर सैन्य कार्रवाई का विकल्प फिलहाल टाल दिया है। ऐसी भी सूचना है कि ट्रंप के कई करीबी सहयोगियों ने भी ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए सैन्य कार्रवाई के विकल्प का विरोध किया है। ऐसे में माना जा रहा है कि ट्रंप ऐसा कोई कदम नहीं उठना चाहते हैं, जिससे उनके सभी करीबी सहयोगी विरोधियों में बदल जाएं। चूकि नाटो के अधिकतर शक्तिशाली देश ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे के विरोध में हैं। ऐसे में ट्रंप इससे भी बचना चाहते हैं कि उनके सिर पर नाटो को खत्म करने का दाग लगे।
नाटो देशों की एकजुटता से बैकफुट पर ट्रंप
ट्रंप की धमकियों के बाद ग्रीनलैंड में सैन्य अभ्यास के लिए सैन्यकर्मी भेजे हैं। इसे अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, सैनिकों की संख्याबेहद कम है। ब्रिटेन और नीदरलैंड ने भी एक-एक सैन्य अधिकारी भेजा, जबकि फिनलैंड और स्वीडन ने दो-दो सैनिक भेजे हैं। फ्रांस और जर्मनी ने 15 और 13 सैनिकों को भेजा है। माना जा रहा है कि नाटो देशों की एकजुटता को देखते हुए ट्रंप ग्रीनलैंड के खिलाफ सैन्य विकल्प के इस्तेमाल से बच रहे हैं।













