संत रविदास जी की जयंती माघ पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी, रविवार को सुबह 5 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 2 फरवरी, सोमवार को सुबह 3 बजकर 38 मिनट तक रहेगी। ऐसे में संत रविदास जयंती , 1 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। इस बार यह गुरु रविदास की 649वीं जयंती है।
गुरु रविदास जी का जन्म
बता दें कि संत गुरु रविदास जी का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था। माना जाता है कि संत रविदास का जन्म संवत 1337 ई. को माघ मास की पूर्णिमा के दिन ही हुआ था। इसलिए यहां बेहद भव्य तरीके से संत रविदास जी की जयंती को मनाया जाता है। इस दिन लोग रविदास जयंती मनाने के लिए हैं दूर-दूर से आते हैं। गुरु रविदास की तस्वीर को लेकर लोग जुलूस निकालते हैं, आरती करते हैं और उनके गीत गाते हैं।
रविदास जी की आरती
नामु तेरो आरती भजनु मुरारे,हरि के नाम बिनु झूठे सगल पसारे।
नाम तेरा आसनो नाम तेरा उरसा,नामु तेरा केसरो ले छिटकारो।
नाम तेरा अंभुला नाम तेरा चंदनोघसि,जपे नाम ले तुझहि कउ चारे।
नाम तेरा दीवा नाम तेरो बाती,नाम तेरो तेल ले माहि पसारे।
नाम तेरे की ज्योति जगाई,भइलो उजिआरो भवन सगलारे।
नाम तेरो तागा नाम फूल माला,भार अठारह सगल जूठारे।
तेरो कियो तुझ ही किया अरपउ,नाम तेरो तुही चंवर ढोलारे।
दस अठा अठसठे चारे खानी,इहै वरतणि है सगल संसारे।
कहै ‘रविदास’ नाम तेरो आरती,सतिनाम है हरिभोग तुम्हारे।













