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    Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi | श्री हनुमान चालीसा दोहा श्रीगुरु चरन सरोज रज , निजमन मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।। बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।। चौपाई जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। राम दूत अतुलित बल धामा।


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    By Azad Hind Desk फरवरी 17, 2026
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    Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi | श्री हनुमान चालीसा

    दोहा

    श्रीगुरु चरन सरोज रज , निजमन मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।।

    बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।

    बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

    चौपाई

    जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।

    जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

    राम दूत अतुलित बल धामा।

    अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

    महाबीर बिक्रम बजरंगी।

    कुमति निवार सुमति के संगी।।

    कंचन बरन बिराज सुबेसा।

    कानन कुण्डल कुँचित केसा।।

    हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे।

    कांधे मूंज जनेउ साजे।।

    शंकर सुवन केसरी नंदन।

    तेज प्रताप महा जग वंदन।।

    बिद्यावान गुनी अति चातुर।

    राम काज करिबे को आतुर।।

    प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।

    राम लखन सीता मन बसिया।।

    सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।

    बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

    भीम रूप धरि असुर संहारे।

    रामचन्द्र के काज संवारे।।

    लाय सजीवन लखन जियाये।

    श्री रघुबीर हरषि उर लाये।।

    रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।

    तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

    सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।

    अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं।।

    सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।

    नारद सारद सहित अहीसा।।

    जम कुबेर दिगपाल जहां ते।

    कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

    तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।

    राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

    तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।

    लंकेश्वर भए सब जग जाना।।

    जुग सहस्र जोजन पर भानु।

    लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

    प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।

    जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

    दुर्गम काज जगत के जेते।

    सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

    राम दुआरे तुम रखवारे।

    होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

    सब सुख लहै तुम्हारी सरना।

    तुम रच्छक काहू को डर ना।।

    आपन तेज सम्हारो आपै।

    तीनों लोक हांक तें कांपै।।

    भूतपिसाच निकट नहिं आवै।

    महाबीर जब नाम सुनावै।।

    नासै रोग हरे सब पीरा।

    जपत निरन्तर हनुमत बीरा।।

    संकट तें हनुमान छुड़ावै।

    मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

    सब पर राम तपस्वी राजा।

    तिन के काज सकल तुम साजा।।

    और मनोरथ जो कोई लावै।

    सोई अमित जीवन फल पावै।।

    चारों जुग परताप तुम्हारा।

    है परसिद्ध जगत उजियारा।।

    साधु संत के तुम रखवारे।।

    असुर निकन्दन राम दुलारे।।

    अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता।

    अस बर दीन जानकी माता।।

    राम रसायन तुम्हरे पासा।

    सदा रहो रघुपति के दासा।।

    तुह्मरे भजन राम को पावै।

    जनम जनम के दुख बिसरावै।।

    अंत काल रघुबर पुर जाई।

    जहां जन्म हरिभक्त कहाई।।

    और देवता चित्त न धरई।

    हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

    संकट कटै मिटै सब पीरा।

    जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

    जय जय जय हनुमान गोसाईं।

    कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

    जो सत बार पाठ कर कोई।

    छूटहि बन्दि महा सुख होई।।

    जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।

    होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

    तुलसीदास सदा हरि चेरा।

    कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।

    दोहा

    पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

    राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

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    श्री हनुमान चालीसा से जुड़े कुछ सवाल के जवाब (FAQs)

    1. हनुमान चालीसा का पहला दोहा- कौन सा है? श्रीगुरु चरन सरोज रज , निजमन मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।। इसमें रघुवर हनुमानजी के आदेश पर तुलसीदास जी ने शामिल किया है क्योंकि यह हनुमानजी के प्रभु श्रीराम के नाम गुनगान से आरंभ होता है।
    2. हनुमान चालीसा का पाठ कब करना चाहिए? हनुमान चालीसा का पाठ सुबह ब्रह्म मुहूर्त में 4 बजे से 6 बजे के बीच करना और शाम में 8 बजे के बाद घी का दीप जलाकर करना उत्तम फलदायी माना गया है।
    3. हनुमान चालीसा का पाठ कम से कम कितने दिन करना चाहिए?
      हनुमान चालीसा का पाठ करने का नियम यह है कि कम से कम 40 दिनों तक लगातार करें। पाठ का आरंभ शुक्ल पक्ष में मंगलवार के दिन से करना उत्तम होता है।
    4. हनुमान चालीसा का पाठ कितनी बार करना फलदायी होता है।
      हनुमान चालीसा में इसका उत्तर स्वयं तुलसीदासजी देते हैं कि, 7 बार पाठ करने से मनुष्य सभी बंधनों से छूट जाता है। वैसे विषम संख्या में 1,3, और 11 बार भी पाठ कर सकते हैं। 101 बार पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।
    5. हनुमान चालीसा का पाठ महिलाएं कर सकती हैं?
      हनुमान चालीसा का पाठ सभी के लिए है। स्त्री पुरुष, किन्नर भी हनुमान चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
    6. मासिक धर्म के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ किया जा सकता है?
      मासिक धर्म के दौरान मूर्ति और देव स्पर्श को शास्त्र विहित नहीं माना गया है। मानसिक पाठ करने की मनाही नहीं है, इसलिए हनुमान चालीसा का पाठ किया जा सकता है।
    7. हनुमान चालीसा की रचना किसने की है।
      हनुमान चालीसा में वर्णित है कि हनुमान चालीसा की रचना गोस्वामी तुलसीदासजी ने की है।
    8. हनुमान चालीसा पाठ से क्या लाभ मिलता है?
      कलियुग में हनुमानजी प्रत्यक्ष देवता माने जाते हैं। हनुमान चालीसा पाठ से कुंडली में मंगल की स्थिति मजबूत होती है और शनि से संबंधित कष्ट जिसमें साढेसाती और ढैय्या भी शामिल है का निवारण होता है। यह भय को दूर करने वाला है। और संकट से छुड़ाने वाला है।
    9. हनुमान चालीसा का पाठ बेड पर बैठकर कर सकते हैं?
      अगर आप बीमार और बैठने में असमर्थ नहीं हैं तो हनुमान चालीसा का पाठ बेड पर बिल्कुल भी न करें। हनुमान चालीसा पाठ का विधान है कि लाल आसन बिछाकर पूजा घर में हनुमानजी की मूर्ति या तस्वीर को सामने रखकर घी का दीप जलाएं फिर भगवान श्रीराम का ध्यान करें इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करें।
    10. हनुमान चालीसा का पहला दोहा- कौन सा है?
      श्रीगुरु चरन सरोज रज , निजमन मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।। इसमें रघुवर हनुमानजी के आदेश पर तुलसीदास जी ने शामिल किया है क्योंकि यह हनुमानजी के प्रभु श्रीराम के नाम गुनगान से आरंभ होता है।
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