2050 तक वैश्विक तापमान 2 डिग्री से ज्यादा होगा। रिपोर्ट के अनुसार, पैरिस एग्रीमेंट का लक्ष्य दुनिया के तापमान को 1.5 डिग्री बढ़ने से रोकना है, लेकिन अब ऐसा होना लगभग नामुमकिन हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, 2010 में दुनिया की 23% आबादी अत्यधिक गर्मी की मार झेल रही थी। अगले दशक यह बढ़कर 41% हो गई है।
दोगुना होगा तापमान
2006 से 16 के दौरान ग्लोबल औसत तापमान प्री-इंडस्ट्रियल स्तर की तुलना में एक डिग्री बढ़ा था। स्टडी के अनुसार, एक डिग्री की तुलना में 2050 तक ब्रिटेन, स्वीडन, फिनलैंड में पारा 150% सेल्सियस तक बढ़ सकता है। इस तुलना में नॉर्वे में 200% और आयरलैंड में 230% तक तापमान की बढ़ोतरी होगी। रिपोर्ट के अनुसार, ठंडे देशों में तापमान बढ़ने का पूरी दुनिया के हर सेक्टर पर काफी ज्यादा गंभीर असर हो सकता है।
1.5 डिग्री से ज्यादा तापमान पर असर
इंजिनियरिंग साइंस के असोसिएट प्रफेसर डॉ. जीसस लिजाना ने कहा कि इस स्टडी में पता चलता है कि ठंड और गर्मी में अधिकतर बदलाव 1.5 डिग्री सेलिस्यस की सीमा तक पहुंचने से पहले ही हो जाते है। इसके लिए महत्वपूर्ण उपायों को शुरू में ही लागू करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगले 5 साल में कई घरों में एसी की जरूरत हो सकती है, लेकिन यदि वैश्विक तापमान वृद्धि 2 डिग्री पर पहुंचा तो हालात बिगड़ सकते है। स्मिथ स्कूल ऑफ एंटरप्राइज एंड द एनवायरमेंट की असोसिएट प्रफेसर डॉ. राधिका खोसला ने बताया कि 2050 तक कार्बन उत्सर्जन को नेट जीरो का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए भवन निर्माण क्षेत्र को कार्बनमुक्त करना होगा। 1.5 डिग्री से अधिक तापमान वृद्धि का शिक्षा और स्वास्थ्य से लेकर रहन सहन और कृषि तक हर चीज पर प्रभाव पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, अत्यधिक गर्मी में कूलिंग के लिए बिजली की मांग बढ़ेगी और कार्बन उत्सर्जन भी बढ़ जाएगा।













