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  • Hindu Nav Varsh 2026 : हिंदू नव वर्ष 2026 कब से शुरु? राजा गुरु का ऐसा रहेगा प्रभाव

    हिंदू नव वर्ष का आरंभ होने वाला है। दरअसल, चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिंदू नव वर्ष का आरंभ होगा। हिंदू नव वर्ष वैदिक कैलेंडर के हिसाब से तय किया जाता है। हिंदू कैलेंडर का नाम विक्रमी संवत है। इस साल विक्रमी संवत 2083 का आरंभ होगा। हिंदू नव वर्ष का


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    By Azad Hind Desk फरवरी 12, 2026
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    हिंदू नव वर्ष का आरंभ होने वाला है। दरअसल, चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिंदू नव वर्ष का आरंभ होगा। हिंदू नव वर्ष वैदिक कैलेंडर के हिसाब से तय किया जाता है। हिंदू कैलेंडर का नाम विक्रमी संवत है। इस साल विक्रमी संवत 2083 का आरंभ होगा। हिंदू नव वर्ष का आरंभ 19 मार्च से होने वाला है। आइए जानते हैं हिंदू नववर्ष से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें।

    कब से शुरु हो रहा है हिंदू नव वर्ष 2026 ?
    नव विक्रमी संवत् 2083 का आरंभ 19 मार्च 2026 को हो रहा है। संवत 2083 का नाम रौद्र होगा। बता दें कि हिंदू नव वर्ष का आरंभ उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में और शुक्ल योग में मीन लग्न में होगा। शास्त्रों और प्रचलित परंपरा के अनुसार, नवसंवत के राजा का निर्णय चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के वार अनुसार ही किया जाता है। गुरुवार से नव संवत का आरंभ होने के कारण आगामी वर्ष (संवत्) का राजा ‘गुरु’ होंगे। साथ ही इस संवत का मंत्री मंगल होंगे।

    रौद्र संवत का प्रभाव

    ‘मध्यसस्या भवेद्धात्री सामान्येन प्रवर्तनम् ।
    दुर्मतीनां महत्त्वं स्याद् दुर्मतौ वर्णसंक्रमः ।।’

    इसका मतलब है कि रौद्र नामक वर्ष संवत का आरंभ होने का अर्थ है कि इस वर्ष बारिश पहले के मुकाबसे थोड़ा कम होगी। जिसका असर फसल पर भी दिखाई देगा। यानी इस साल फसलों का किमतों में भारी उछाल आएगा। संवत की गणना के अनुसार, इस साल सरकार कुछ ऐसा फैसले ले सकती है कि जिससे जनता में व्याकुलता बढ़ेगी। विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों में वाद विवाद और विरोध होने की संभावनाएं हैं। जंगल या खलियानों में आग आदि लगने की आशंका है।

    क्यों चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही आरंभ होता हिंदू नव वर्ष ?

    ब्रह्म पुराण के अनुसार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को सूर्योदय के समय ही ब्रह्माजी ने इस सृष्टि की रचना की थी। इसके अलावा सतयुग का आरंभ भी इसी दिन हुआ था। इसी महत्व के कारण महामहिम सार्वभौम सम्राट विक्रामादित्य जी ने भी अपने संवत्सर का आरंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपगा के दिन सूर्योदय के समय माना था। बता दें कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि जिन दिन होती है उस दिन के वार के अनुसार, ही हिंदू नव वर्ष का राजा तय किया जाता है अगर यह तिथि दो दिन लग रही हो तो पहले दिन के वार स्वामी को ही वर्ष का राजा माना जाता है।

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