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  • Holi Colours Importance : होली पर क्यों खेलते हैं रंग गुलाल? अलग-अलग रंगों का होता है खास महत्व

    होली के त्योहार का हिंदू धर्म में खास महत्व होता है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन के साथ लोग उत्साह पूर्वक रंगोत्सव का त्योहार मनाते हैं। कुछ लोग होलिका की राख से भी होली खेलते हैं। कुछ लोग खास तौर पर बच्चे तो पानी से भी होली खेलते हैं लेकिन होली का मुख्य


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    By Azad Hind Desk फरवरी 25, 2026
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    होली के त्योहार का हिंदू धर्म में खास महत्व होता है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन के साथ लोग उत्साह पूर्वक रंगोत्सव का त्योहार मनाते हैं। कुछ लोग होलिका की राख से भी होली खेलते हैं। कुछ लोग खास तौर पर बच्चे तो पानी से भी होली खेलते हैं लेकिन होली का मुख्य आकर्षण रंग होते हैं। और लोग एक दूसरे पर लाल, पीला, हरा, नीला, सफेद, चमकीले रंग लगाकर भी होली का आनंद मनाते हें। रंगोत्सव का यह त्योहार भारत सहित नेपाल में भी बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। साथ ही भारतीय दुनिया के किसी भी देश में रहें अपनी परंपरा के अनुसार रंगोत्सव का त्योहार मनाते हें। दरअसल होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत और अधर्म पर धर्म की जीत का भी प्रतीक माना गया है। और धार्मिक दृष्टि से होली के रंग इस बात को बयां करते हैं। वैसे होली पर रंग, गुलाल खेलने के और भी कई कारण हैं और इसके लाभ भी बताए जाते हैं। इसके पीछे ज्योतिषीय कारण और पौराणिक कथा छिपी हुई है। आइए विस्तार से जानें कि क्यों खेली जाती है रंगों वाली होली और अलग-अलग रंगों का क्या है महत्व…

    राधा-कृष्ण से संबंधित है होली का त्योहार
    पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण जब बालक थे तब वह इस बात से चिंतित और परेशान थे की क्या गोरी राधा उनके सांवले रंग को पसंद करेंगी। तब यशोदा मईया ने कहा की राधा के पास जाओ और उनसे अपने मुख पर कोई भी रंग लगाने के लिए कहना। ऐसा सुनकर कान्हाजी राधा रानी के पास गए और उन्होंने भगवान कृष्ण को रंग लगाया। ऐसी मान्यता है कि तभी से होली के दिन रंग और गुलाल लगाने की परंपरा शुरू हुई। मथुरा वृंदावन की लोक कथाओं में इस तरह की कथा लोग कहते सुनाते हैं।

    होली के रंगों का अलग-अलग ग्रहों से है संबंध
    ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, होलाष्टक से लेकर होलिका दहन तक की अवधि को प्रतिकूल माना गया है। मान्यता है की इस दौरान सभी ग्रह उग्र स्थिति में रहते हैं। पंडित राकेश झा बताते हैं कि, रंगों का अलग-अलग ग्रहों से संबंध होता है। रत्न भी अलग-अलग रंग के होते हैं और ग्रहों के रंग के अनुसार अलग-अलग ग्रहों का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। होली के दिन अलग-अलग रंगों का इस्तेमाल करने से ग्रहों की प्रतिकूलता और नकारात्मकता दूर होती है। साथ ही, इससे सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। ऐसी मान्यता है की ये रंग हमारे अंदर ऊर्जा और उत्साह भरते हैं। साथ ही, इससे आरोग्य की भी प्राप्ति होती है। रंगों का त्योहार होली चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। चैत्र वह महीना है जब सर्दी समाप्त हो रही होती है और गर्मी चढान पर होती है यानी यह ऋतुओं का संक्रमण काल भी होता है। प्राचीन मान्यता है कि, इस समय संक्रामक रोग भी विकसित होते हैं, और प्राकृतिक रंग रोगों से रक्षा करते हैं, इसलिए कई क्षेत्रों में इस समय पशुओं को भी रंग लगाया जाता है।

    वैसे आज कल केमिकल वाले रंग भी खूब प्रयोग किए जाने लगे हैं तो इनसे लाभ की बजाय नुकसान भी हो कता है। इसलिए शास्त्रीय मत यह कहता है कि प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग करना चाहिए जो सकारात्मकता बढते हैं।
    गुलाल के अलग-अलग रंगों का महत्व

    • हरा रंग- ज्योतिषशास्त्र में हरे रंग को बुध ग्रह से संबंधित माना गया है। यह रंग विकास, समृद्धि, संतुलन और शांति का प्रतीक है।
    • पीला रंग- यह रंग गुरु ग्रह से संबंधित होता है। पीला रंग ज्ञान, पवित्रता, ऊर्जा और खुशी का प्रतीक है। होली पर इस रंग का प्रयोग करने से जीवन में सकारात्मकता आ सकती है। दरअसल यह गुरु के शुभ प्रभाव को बढाने का काम करता है।
    • लाल रंग- ज्योतिषशास्त्र में लाल रंग को मंगल ग्रह से संबंधित माना गया है। इसे ऊर्जा, शक्ति और साहस का प्रतीक माना गया है।
    • गुलाबी रंग- यह रंग शुक्र ग्रह से संबंधित होता है। गुलाबी रंग को प्रेम, कोमलता, शांति और स्नेह का प्रतीक माना गया है।
    • नारंगी रंग- ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, नारंगी रंग सूर्य ग्रह से संबंधित होता है। यह ऊर्जा, उत्साह, खुशी और रचनात्मकता का प्रतीक है।
    • नीला रंग- यह रंग शनि ग्रह से संबंधित माना गया है। नीला रंग स्थिरता, विश्वास, शांति और सुरक्षा का प्रतीक होता है।
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