ज्योतिष शास्त्र में मेदनीय ज्योतिष के अन्तर्गत होलिका जलने के मुहूर्त से लेकर होलिका दहन के समय तथा होलिका जलने के बाद होली की अग्नि से उत्पन्न होने वाले धुएं से भी शुभाशुभ विचार करने की प्राचीन परम्परा है। होलिका दहन के समय यदि होलिका से उठने वाला धुंआ अथवा होली की अग्नि की लपटें पूर्व की ओर जाए यानि कि होली पर पूर्व दिशा की ओर हवा चले तो संहिता ग्रंथों के अनुसार यह समझना चाहिए कि राजा एवं प्रजा, दोनों के लिए उस वर्ष की होली सुखमय रहेगी यानि कि पूरे राज्य में सुख, सम्पन्नता का वास होगा।
- होलिका दहन के समय यदि होलिका से उठने वाला धुंआ दक्षिण दिशा की ओर जाने लगे यानि कि होली पर दक्षिण की ओर होलिका दहन के समय हवा चल रही हो, तो इस शकुन संकेत से विद्वान ज्योतिषाचार्यों द्वारा यह अभिप्राय निकाला जाता है कि ऐसी परिस्थिति में राज्य की सत्ता भंग और दुर्भिक्ष की सम्भावनाऐं बढ़ जाती हैं।
- होलिका दहन के समय यदि होलिका से उठने वाला धुंआ एवं अग्नि की लपटें पश्चिम की ओर जाने लगें यानि कि होलिका दहन के समय पश्चिम दिशा की ओर हवा चले तो इसे अच्छा माना जाता है, इसके कारण आम जनमानस में सौहार्द की भावना विकसित होती है, साथ ही देश की आर्थिक व्यवस्था मजबूत होती है।
- होलिका दहन के समय यदि होलिका से उठने वाला धुंआ उत्तर दिशा की ओर जाने लगे यानि कि होली पर उत्तर की ओर होलिका दहन के समय हवा चल रही हो, तो इस शकुन संकेत से विद्वान ज्योतिषाचार्यों द्वारा यह अभिप्राय निकाला जाता है कि ऐसी परिस्थिति में फसल की पैदावार अच्छी होती है और धान्य की वृद्धि होती है।
- होलिका दहन के समय होलिका की अग्नि अथवा होलिका का धुंआ यदि पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण दिशा की ओर न जाकर आकाश की तरफ सीधा जाए तो यह संकेत उस देश के राजा को शोक अर्थात् सत्ता परिवर्तन का प्रबल योग बनाता है।
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