क्या गर्भवती महिलाओं को होलिका दहन देखना चाहिए?
कुछ स्थानीय परंपराओं के अनुसार, होलिका दहन के दिन गर्भवती महिलाओं को अग्नि की परिक्रमा करने से बचना चाहिए। क्योंकि, अग्नि की तेज गर्मी और धुआं नुकसानदायक साबित हो सकता है। यही कारण है कि गर्भवती महिलाओं को होलिका दहन की अग्नि के पास जाना वर्जित माना जाता है। इसकी बजाए, आप मानसिक पूजा और भगवान का ध्यान कर सकती हैं।
गर्भवती महिलाएं कैसे करें होलिका दहन की पूजा ?
ज्योतिष एक्सपर्ट डॉ. मधु प्रिया प्रसाद के अनुसार, होलिका दहन की पूजा करने के लिए गर्भवती महिलाएं अग्नि से कुछ दूरी पर खड़े होकर मानसिक पूजा और प्रार्थना कर सकती हैं। साथ ही, मंत्रों का जाप भी किया जा सकता है। इससे जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है। होलिका दहन पर आप अग्नि में उपले, अनाज, सरसों आदि अर्पित करने के लिए उन्हें अपने हाथों से स्पर्श करके परिवार के किसी सदस्य से अर्पित करा सकती हैं।
होलिका दहन का महत्व
यह दिन होलिका और भक्त प्रह्लाद की कथा से संबंधित है। हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बुलाकर उसे प्रह्लाद के साथ अग्नि में बैठने को कहा था क्योंकि, होलिका को कभी न जलने का वरदान प्राप्त था। लेकिन जब होलिका प्रह्लाद के गोद में लेकर अग्नि में बैठी, तो अपने वरदान का दुरुपयोग करने के कारण वह भस्म हो गई और विष्णुजी के भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बाहर आ गए। ऐसे में इस दिन को भय और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना गया है। वहीं, होलिका दहन की अग्नि को बेहद पवित्र माना जाता है।
4 मार्च को मनाई जाएगी होली
होलिका दहन के बाद अगले दिन रंगोत्सव यानी होली का त्योहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। वहीं, मथुरा-वृंदावन में होली 9 दिनों तक मनाई जाती है जिसकी शुरुआत लड्डू मार होली से होती है और रंगों वाली होली से अगले दिन इसका समापन होता है। इस बार रंगोत्सव 4 मार्च, बुधवार के दिन मनाया जाएगा। इससे एक दिन पहले यानी होलिका दहन के दिन स्नानादि करने के पश्चात साफ वस्त्र धारण करने चाहिए और फिर, विधि-विधान से पूजा करें। ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और वास्तु दोष से भी राहत मिल सकती है।














