होलिका दहन के दौरान होलिका की परिक्रमा की जाती है। होलिका दहन की अग्नि की परिक्रमा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। पंड़ित राकेश झा ने बताया है कि होलिका दहन की परिक्रमा करते हुए कुछ विशेष मंत्रों का जप करना चाहिए। ताकि घर परिवार में सुख समृद्धि बनी रहें। साथ ही देवी देवताओं की कृपा भी बनी रहती है। आइए जानते हैं होलिका दहन पर किन मंत्रों का जप करना चाहिए। पढ़ें होलिका दहन के विशेष मंत्र।
होलिका दहन के मंत्र
1) अहकूटा भयत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै:,
अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम।
होलिका दहन के दिन इस मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें। इस मंत्र का जप करने के लिए आप एक तुलसी की माला लें इसके बाद अपने घर के मंदिर में बैठकर इसका जप कम से कम 108 बार करें। साथ ही होलिका की परिक्रमा करते हुए भी इस मंत्र का जप कर सकते हैं। इस मंत्र का जप करने से घर परिवार में सुख समृद्धि बनी रहती है।
2) वंदितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च।
अतस्त्वं पाहि मां देवी! भूति भूतिप्रदा भव।।
होलिका दहन का महत्व
होलिका दहन की राख जब ठंड़ी हो जाए तो उसे अपने घर लाकर उस विभूति को अपने शरीर पर लगाएं और शरीर पर लगाते समय इस मंत्र का जप जरुर करें।
3) ऊं नमों भगवते वासुदेवाय नम:
होलिका दहन की रात भगवान विष्णु के इस मंत्र का जप जरुर करें। होलिका की परिक्रमा करते हुए मन ही मन इस मंत्र का उच्चारण करें। ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।
4) ओम होलिकायै नम:
अगर आपकी कोई मनोकामना है तो होलिका की परिक्रमा करते हुए इस मंत्र का जप करें और एक नारियल इस दौरान अपने हाथ में रखें। इस मंत्र का जप करके हुए परिक्रमा कर नारियल को होलिका में अर्पित कर दें।
5) ओम नृम नरसिंहाय शत्रुबल विदीर्नाय नमः
होलिका दहन के समय परिक्रमा करते हुए भगवान नरसिंह के इस मंत्र का जप जरुर करें। मान्यता है कि इस मंत्र का जप करने से आपके शत्रु कमजोर होते हैं। साथ ही आरोग्य सुख प्राप्त होता है।














