पं. राकेश झा के अनुसार, होलिका दहन को लेकर धर्मसिंधु नामक ग्रंथ में बताया गया है कि- सा प्रदोषव्यापिनी भद्रारहित ग्राह्या यानी पूर्णिमा तिथि में भद्ररहित काल में होलिका दहन किया जाना चाहिए। होलिका दहन के लिए यह प्रथम नियम है कि फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तिथि में भद्रारहित प्रदोष काल में होलिका दहन किया जाना चाहिए।
होलिका दहन 2026 महत्वपूर्ण जानकारी
| होलिका दहन | 2 मार्च 2026 |
| होलिका दहन मुहूर्त (होली कब जलेगी) | शाम 6 बजकर 22 मिनट से 9 बजकर 33 मिनट |
| पूर्णिमा तिथि की शुरुआत | 2 मार्च, 5 बजकर 56 मिनट |
| पूर्णिमा तिथि की समाप्त | 3 मार्च, शाम 5 बजकर 8 मिनट |
| भद्रा काल आरंभ | 2 मार्च, शाम 5 बजकर 56 मिनट |
| भद्रा काल समाप्त | 3 मार्च, सुबह 5 बजकर 32 मिनट |
लेकिन अगर दोनों दिन पूर्णिमा तिथि व्याप्त हो और दोनों ही दिन प्रदोष काल को पूर्णिमा तिथि स्पर्श कर रही हो तो पहले ही दिन भद्रारहित प्रदोष काल में होलिका दहन कर लेना चाहिए। लेकन इस बार होलिका दहन पर यह भी पेंच है कि पहले दिन यानी 2 मार्च को पूर्णिमा तिथि शाम में 5 बजकर 56 मिनट से लग जा रही है और इसी के साथ भद्रा भी लग जा रही है। और भद्रा पर समाप्त हो रही है।
जबकि पूर्णिमा तिथि 3 मार्च को शाम में प्रदोष काल लगने से पहले ही शाम 5 बजकर 8 मिनट पर समाप्त हो रही है। ऐसे में शास्त्रविहित नियम के अनुसार भद्रामुख और पुच्छ को त्यागकर 2 मार्च को ही भद्राकल में होलिका दहन किया जाना चाहिए।
भद्रापुच्छ का समय होलिका दहन पर रात 12 बजकर 50 मिनट से 2 बजे तक होगा। जबकि भद्रा मुख जिससे सबसे ज्यादा वर्जित माना गया है वह समय 2 मार्च को निशीथ काल के बाद रात 2 बजकर 38 मिनट से सुबह 5 बजकर 32 मिनट तक होगा। ऐसे में होलिका दहन का शुभ समय 2 मार्च को प्रदोष काल में शाम 6 बजकर 22 मिनट से 9 बजकर 33 मिनट के बीच किया जाना उत्तम होगा।
भद्रा मुख में होलिका दहन से क्या होता है
होलिका दहन पर भद्रा से बचने की सलाह दी जाती है। इसमें भी भद्रामुख कल में होलिका दहन सबसे अशुभ माना गया है। ऐसी मान्यता है कि भद्रा जो शनि की बहन है सर्प रूप में तीनों लोक में विचरण करती है। वह शुभ कार्य में विघ्न डालती है। ऐसे मे भद्रामुख काल में होलिका दहन करने से क्षेत्र विशेष में कुछ न कुछ अप्रिय घटना घटित होती है। इसलिए शुभ फल की प्राप्ति के लिए भद्रा से रहित और विशेष रूप से भद्रामुख से रहित काल में होलिका दहन करने का विधान है।














