भारतीय वायुसेना द्वारा सोमवार को एक्स पर जारी किए गए वीडियो में राफेल, सुखोई और स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान मिसाइलों से लोड हाईप्लाइंट्स पर दिखे। इन विमानों में मेट्योर और ब्रह्मोस जैसी हाई लेवल की मिसाइलें लगी थीं, जिनका इस्तेमाल ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के खिलाफ किया गया था।
वायुसेना ने सस्पेंस किया खत्म
भारतीय वायुसेना द्वारा जारी किए गए इस वीडियो ने महीनों से चल रहे उस सस्पेंस को खत्म कर दिया है, जिसमें पाकिस्तान और पश्चिमी मीडिया द्वारा दावा किया गया था कि भारत के पास बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (BVR) मेट्योर मिसाइल नहीं है। वायुसेना का यह वीडियो पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर के खोखले दावों पर तमाचा है।
हवा से हवा में मार करने में सक्षम
मेट्योर एक अगली पीढ़ी की बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणाली है। इसे 21वीं सदी में हवा से हवा में होने वाली लड़ाई में सटिकता से मार करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह एक साथ कई लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता रखती है। यह लड़ाकू विमानों जैसे अत्यधिक पैंतरेबाजी करने वाले लक्ष्यों और ड्रोन व क्रूज मिसाइलों जैसे छोटे लक्ष्यों को भी 200 किमी से अधिक की दूरी से निशाना बना सकती है।
मेट्योर मिसाइल सॉलिड-फ्यूल रैमजेट मोटर मिसाइल को Mach 4 से अधिक स्पीड से उड़ने में मदद करती है। यह किसी भी एयर-टू-एयर मिसाइल सिस्टम की तुलना में सबसे बड़ा ‘नो एस्केप जोन’ प्रदान करती है। जो मौजूदा मीडियम-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलों से कई गुना बड़ा है। इसका फ्रैगमेंटेशन वॉरहेड अधिकतम मारक क्षमता सुनिश्चित करता है।
2016 में हुई थी 36 राफेल विमानों की डील
बता दें सितंबर 2016 में भारत और फ्रांस ने 36 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए 7.87 बिलियन यूरो का सौदा किया था। इन विमानों को लेटेस्ट मिसाइलों और हथियार प्रणालियों से लैस किया गया है। इस सौदे के तहत राफेल विमानों में मेट्योर और स्कैल्प मिसाइलें शामिल थीं। हालांकि, कुछ लोगों को संदेह था कि क्या भारत को राफेल जेट पैकेज के साथ मेट्योर मिसाइलें मिलीं। लेकिन वायुसेना के इस वीडियो ने इस अटकल को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।
एक और वीडियो में एक तेजस लड़ाकू विमान को मेट्योर मिसाइल दागते हुए दिखाया गया है। 2019 के बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक में भारतीय वायुसेना द्वारा इस्तेमाल की गई मिसाइलों के समान मॉडल से एक पूरी तरह से लोड किया गया मिराज 2000 भी लैस था। वीडियो में, वायुसेना ने रैम्पेज एयर-टू-सरफेस मिसाइल को भी दिखाया, जो अपनी सटीक मारक क्षमता के लिए जानी जाती है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान IAF के सुखोई-30MKI विमानों ने रैम्पेज मिसाइलों का इस्तेमाल किया था।












