वहीं अगर आपकी कमाई 12 लाख 75 हजार रुपये से ज्यादा हो जाती है, तब आपको टैक्स भरना पड़ता है। लेकिन एक और तरीका है जिससे आप अपनी कमाई को टैक्स-फ्री रख सकते हैं, वो भी नई टैक्स व्यवस्था में। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार अगर आपका एम्प्लॉयर (कंपनी) आपको एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (ईपीएफ) और नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में योगदान करने की सुविधा देता है, तो आप अपनी 14.66 लाख रुपये तक की सैलरी को भी टैक्स-फ्री बना सकते हैं।
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कैसे कर सकते हैं टैक्स-फ्री?
करीब 15 लाख रुपये (14.66 लाख रुपये) की इनकम टैक्स फ्री कराने के लिए जरूरी है कि आपकी कंपनी EPFO और NPS दोनों का हिस्सा हो और आपको इनमें पैसे जमा करने की इजाजत दे। अगर आपकी कंपनी ईपीएफ में टैक्स छूट का फायदा तो देती है, लेकिन एमपीएस में नहीं, तब भी आप अपनी 13.56 लाख रुपये की सैलरी को नई टैक्स व्यवस्था में टैक्स-फ्री कर सकते हैं।
कैसे मिलती है छूट?
मखीजानी गेरा एंड एसोसिएट्स एलएलपी के मैनेजिंग पार्टनर गौरव मखीजानी बताते हैं कि नई टैक्स व्यवस्था चुनने वाले लोगों के लिए EPF में कर्मचारी के तौर पर जमा किए गए पैसे पर सेक्शन 80C के तहत कोई छूट नहीं मिलती। यह पुरानी टैक्स व्यवस्था से अलग है, जहां EPF के पैसे पर सेक्शन 80C में छूट मिल जाती थी।
मखीजानी कहते हैं, ‘यहां, एम्प्लॉयर (कंपनी) का योगदान बेसिक सैलरी और डियरनेस अलाउंस (DA) के 12% तक दोनों ही टैक्स व्यवस्थाओं (पुरानी और नई) में टैक्स-फ्री रहता है। हालांकि, यह कुल 7.5 लाख रुपये की सीमा के अंदर होना चाहिए, जो पुरानी और नई दोनों टैक्स व्यवस्थाओं पर लागू होती है।’
मखीजानी आगे बताते हैं कि एनपीएस के मामले में, नई टैक्स व्यवस्था में कर्मचारी के अपने योगदान पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलती। लेकिन, एम्प्लॉयर का योगदान, जो बेसिक सैलरी और डियरनेस अलाउंस के 14% तक हो सकता है, पुरानी और नई दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में टैक्स-फ्री रहता है।
कैसे टैक्स फ्री की सकते हैं 15 लाख की सैलरी
- मान लीजिए आपकी कुल सैलरी 14.66 लाख रुपये है।
- आपकी बेसिक सैलरी 7.33 लाख रुपये है (14.66 लाख का 50%)।
- आपका एम्प्लॉयर ईपीएफ में आपकी बेसिक सैलरी का 12% यानी लगभग 87,960 रुपये का योगदान करता है। यह टैक्स-फ्री है।
- आपका एम्प्लॉयर एनपीएस में आपकी बेसिक सैलरी का 14% यानी लगभग 1,02,620 रुपये का योगदान करता है। यह भी टैक्स-फ्री है।
- इसके अलावा, नई टैक्स व्यवस्था में 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलता है।
अब हिसाब लगाते हैं
कुल सैलरी: 14,66,000 रुपये
एम्प्लॉयर का EPF योगदान (टैक्स-फ्री): 87,960 रुपये
एम्प्लॉयर का NPS योगदान (टैक्स-फ्री): 1,02,620 रुपये
स्टैंडर्ड डिडक्शन: 75,000 रुपये
कुल बचत: 2,65,580 रुपये
आपकी टैक्सेबल इनकम (जिस पर टैक्स लगेगा) इस तरह कम हो जाती है। अगर हम इन छूटों को देखें, तो आपकी प्रभावी कमाई जिस पर टैक्स लग सकता है, वह काफी कम हो जाती है, जिससे आपकी 14.66 लाख रुपये की सैलरी टैक्स-फ्री हो जाती है।
रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड
ईपीएफ और एनपीएस सिर्फ टैक्स बचाने के लिए ही नहीं हैं, बल्कि ये लंबे समय में आपके रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा फंड बनाने में भी मदद करते हैं। अगर 25 साल का कोई व्यक्ति NPS में हर महीने 10,000 रुपये जमा करना शुरू करता है और हर साल इस राशि को 5% बढ़ाता है। अगर वह 60 साल की उम्र तक पैसे जमा करता रहता है और उसे सालाना 12% का रिटर्न मिलता है, तो वह 8.62 करोड़ रुपये का एक बड़ा फंड बना सकता है।
इसी तरह, अगर 25 साल का कोई व्यक्ति EPF में हर महीने 10,000 रुपये जमा करना शुरू करता है, हर साल इस राशि को 5% बढ़ाता है, और उसे इस पर 8.25% का ब्याज मिलता है, तो वह लगभग 4.05 करोड़ रुपये का फंड बना सकता है।













