नए ‘फॉर्म 124’ में किरायेदार को यह बताना होगा कि उसका मकान मालिक के साथ क्या रिश्ता है। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए जाने वाले किराये के दावों पर लगाम लगेगी, क्योंकि शुरुआत में ही सब कुछ साफ-साफ बताना होगा। हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के लिए कर्मचारी को किराये की जानकारी देनी होती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जो लोग ईमानदारी से किराया दे रहे हैं उन्हें कोई डरने की जरूरत नहीं है। लेकिन जो लोग बिना किसी भुगतान या या मालिकाना हक के झूठे दावे करते हैं, उन्हें पकड़ना अब आसान होगा।
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जानें अहम बातें
- अब किरायेदार और मकान मालिक का रिश्ता बताना जरूरी होगा, ताकि फर्जी किराये की रसीदों को रोका जा सके।
- कंपनियों को लिखित में देना होगा कि उनके पास सिर्फ एक ही पैन कार्ड है, दूसरा नहीं।
- विदेशी टैक्स क्रेडिट का दावा करने के लिए अब ज्यादा पुख्ता सबूत और ऑडिटर्स की जांच जरूरी होगी।
- कंपनी के खातों में ऑडिटर गड़बड़ी पाता है, तो सीधा असर टैक्स की देनदारी पर पड़ेगा।
विदेशी कमाई पर टैक्स छूट में सख्ती
ड्राफ्ट फॉर्म्स में विदेशी कमाई पर टैक्स छूट के मामले में भी सख्ती की गई है। अब अकाउंटेंट्स को विदेशी टैक्स पेमेंट के सबूत, पेमेंट की रसीद और नियमों की बारीकी से खुद जांच करनी होगी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इससे उन मामलों में थोड़ी मुश्किल हो सकती है जहां विदेशी कंपनियों से मिलने वाली टैक्स रसीदों में पूरी जानकारी अलग-अलग नहीं होती।
कंपनियों को देना होगा डिक्लेरेशन
वहीं कंपनियों के लिए पैन (PAN) कार्ड के आवेदन को लेकर भी नियम सख्त हुए हैं। अब कंपनियों को एक डिक्लेरेशन देना होगा कि उनके पास पहले से कोई पैन नहीं है। नया टैक्स ऑडिट ‘फॉर्म नंबर 26’ अब और भी ज्यादा सख्त हो गया है।














