अंतरिम सरकार के दौरान भारत के साथ रिश्तों की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर विदेश सलाहकार ने कहा कि कई कारणों से इस दौरान दोनों देशों के बीच रिश्ते अच्छे नहीं थे। उन्होंने कहा कि हम भारत के साथ ‘अच्छे कामकाजी रिश्ते’ रखने की बात कर रहे हैं। मैं आपको बता सकता हूं कि मेरी तरफ से या मुख्य सलाहकार या सरकार की राय में कोई टकराव नहीं है। आपकी समझ और जिम्मेदारी के नजरिए से हम सच में भारत के साथ अच्छे कामकाजी रिश्ते रखना चाहते थे। हमने हमेशा यही चाहा है।
भारत-बांग्लादेश में क्यों बिगड़े रिश्ते?
जब उनसे पूछा गया कि रिश्ते आगे क्यों नहीं बढ़े, तो हुसैन ने कहा, कई मामलों में रिश्ते कुछ हद तक रुक गए हैं। मैं यह नहीं कहूंगा कि कोई बड़ा संकट आया है, लेकिन रिश्ता रुका हुआ है। हुसैन ने कहा कि वे किसी पर दोष नहीं डालना चाहते। उन्होंने आगे कहा कि भारत ने निश्चित रूप से अपने हितों के हिसाब से काम किया। हमने वही करने की कोशिश की जो हमें लगा कि यह हमारे हितों की रक्षा करेगा।
हुसैन ने कहा कि दोनों पक्षों के हितों को लेकर सोच में अंतर है। यह वजह है कि हम कई क्षेत्रों में आगे नहीं बढ़ पाए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले सरकार में ये मुद्दे सुलझाए जा सकते हैं। हुसैन ने कहा, उम्मीद है कि मेरे उत्तराधिकारी और इसके बाद आने वाली सरकार अपने समय में फिर एक सहज रिश्ता स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि मुद्दे तो रहेंगे लेकिन एक सहज रिश्ता महत्वपूर्ण है। हमारे समय में रिश्ता बहुत सहज नहीं था।
शेख हसीना पर बोले विदेश सलाहकार
शेख हसीना की वापसी पर भारत के रुख को लेकर उनसे पूछा गया तो हुसैन ने कहा कि रवैये के बारे में बात करना सही नहीं है। जो औपचारिक रूप से किया गया है, उसके बारे में बात की जा सकती है। हमने उन्हें वापस भेजने के लिए कहा है और हमें उनसे (भारत) कोई जवाब नहीं मिला है। इसके अलावा अटकलें लगाना सही नहीं होगा।













