इंडियन इकोनॉमिक जोन प्रोजेक्ट क्या था
रिपोर्ट के अनुसार, भारत और बांग्लादेश में 2015 में मिरसराय इलाके में इंडियन इकोनॉमिक जोन प्रोजेक्ट को लेकर एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग को साइन किया गया था। इसके अंतर्गत बांग्लादेश के नेशनल स्पेशल इकोनॉमिक जोन फ्रेमवर्क के अंदर मिरसराय में सैकड़ों एकड़ जमीन और बागेरहाट के मोंगला में एक और साइट को विकसित करना था। इसके लिए भारत ने बांग्लादेश को रियायती दरों पर लाइन ऑफ क्रेडिट भी दिया था।
बांग्लादेश ने क्या कारण बताया
इस प्रोजेक्ट का मकसद भारत और बांग्लादेश में इंडस्ट्रियल कोलैबोरेशन और इकोनॉमिक इंटीग्रेशन को बढ़ावा देना था। यूनुस सरकार का दावा है कि बांग्लादेश की तरफ से इंटरनेशनल टेंडर की इजाज़त देने समेत प्रोग्रेस के लिए बार-बार रिक्वेस्ट करने के बावजूद, कोई खास तरक्की नहीं हुई। बांग्लादेशी अधिकारियों का दावा है कि इस प्रोजेक्ट में दिए गए फंड का सिर्फ लगभग एक परसेंट ही इस्तेमाल हुआ। भारतीय कॉन्ट्रैक्टर ने बहुत कम दिलचस्पी दिखाई, जिससे प्रोजेक्ट को 2025 के बीच तक G2G फ्रेमवर्क से डीलिस्ट कर दिया गया।
अब डिफेंस इंडस्ट्रियल पार्क बनाएगा बांग्लादेश
BEZA की चौथी गवर्निंग बोर्ड मीटिंग में लिए गए एक पॉलिसी फैसले में, मिरसराय में पहले से दी गई खाली ज़मीन में से लगभग 850 एकड़ को अब मिलिट्री इकोनॉमिक ज़ोन या डिफेंस इंडस्ट्रियल पार्क के लिए तय किया गया है। इस पहल का मकसद बांग्लादेश की घरेलू डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को बढ़ाना है, जिसमें मिलिट्री इक्विपमेंट, कंपोनेंट और उससे जुड़ी टेक्नोलॉजी बनाने पर फोकस किया जाएगा।
डिफेंस इकोनॉमिक जोन में कौन करेगा निवेश
डिफेंस इकोनॉमिक जोन में प्रोडक्ट मैन्युफैक्चरिंग और संभावित इन्वेस्टर्स के बारे में सवालों के जवाब में, आशिक चौधरी ने कहा कि बांग्लादेश के साथ दोस्ताना संबंध रखने वाले कई देशों के साथ बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि इस समय यह बताना संभव नहीं है कि कौन से मिलिट्री उपकरण बनाए जाएंगे, क्योंकि यह डिमांड के आधार पर तय किया जाएगा। BEZA गवर्निंग बोर्ड की मीटिंग में कई अन्य मुद्दों को भी पॉलिसी मंज़ूरी दी गई। मुख्य फैसलों में से एक फ्री ट्रेड जोन स्थापित करना था।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव
इंडियन इकोनॉमिक जोन प्रोजेक्ट को रद्द करने का फैसला ऐसे समय हुआ है, जब मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से भारत-बांग्लादेश संबंध बिगड़ रहे हैं। इस घटना का दोनों देशों के आर्थिक संबंधों पर असर पड़ने की संभावना है। बांग्लादेश के कई प्रोजेक्ट्स भारत के इन्वेस्टमेंट और लाइन ऑफ क्रेडिट पर टिके हुए हैं। इंडियन इकोनॉमिक ज़ोन को एक फ्लैगशिप प्रोजेक्ट के तौर पर देखा गया था जो दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों का प्रतीक था। इससे बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा होने की उम्मीद थी। लेकिन, अब यूनुस सरकार के फैसले से बांग्लादेशी लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर चुका है।













