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  • India EU FTA Deal: सस्ती होने वाली हैं इलेक्ट्रिक गाड़ियां! भारत-ईयू की एफटीए डील से कैसे बदलेगा ईवी का बाजार

    नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) होने वाला है। इससे भारत में यूरोपीय कारों, खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी काफी कम हो जाएगी। यह ड्यूटी 10 से 15% तक हो सकती है। इससे इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कीमत में कमी आ सकती है। इंपोर्ट


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    By Azad Hind Desk जनवरी 25, 2026
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    नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) होने वाला है। इससे भारत में यूरोपीय कारों, खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी काफी कम हो जाएगी। यह ड्यूटी 10 से 15% तक हो सकती है। इससे इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कीमत में कमी आ सकती है। इंपोर्ट ड्यूटी कम होने और कीमतों में गिरावट से यूरोपीय लग्जरी ईवी की बिक्री भारत में बढ़ सकती है। यह जानकारी उन लोगों ने दी है जो इस मामले से जुड़े हैं।

    यह डील 27 जनवरी को होने वाले द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में घोषित हो सकती है। इसके बाद भारत यूरोपीय लग्जरी ईवी के लिए एक आकर्षक मैन्युफैक्चरिंग हब भी बन सकता है। अगर किसी यूरोपीय कार की कीमत 40,000 डॉलर (करीब 37 लाख रुपये) से ज्यादा है तो भारत में उस पर करीब 100% इंपोर्ट ड्यूटी लगाती है। जब भारत-ईयू एफटीए के तहत इंपोर्ट ड्यूटी कम होगी, तो यूरोपीय लग्जरी ईवी बनाने वाली कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स को भारतीय बाजार में और भी किफायती दामों पर बेच पाएंगी।
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    स्थानीय कार निर्माताओं की सुरक्षा

    भारतीय कंपनियां बजट ईवी बनाती हैं। उन पर इस डील का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे यहीं भारत में बनती हैं। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार इस एफटीए में ऐसे नियम भी शामिल होंगे जो बाजार तक पहुंच और घरेलू निर्माताओं जैसे टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा को सुरक्षा प्रदान करेंगे।

    ईवी बनाने वाली कंपनियों के लिए धीरे-धीरे स्थानीय स्तर पर पुर्जे बनाने और वैल्यू-एडिशन के नियम लागू रहेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आयात बढ़ने से भारत की लंबी अवधि की मैन्युफैक्चरिंग योजनाओं को नुकसान न पहुंचे। भारत की ईवी पॉलिसी के अनुसार कंपनी को ऑपरेशन शुरू होने के तीसरे साल तक 25% और पांचवें साल तक 50% घरेलू वैल्यू-एडिशन करना होगा।

    दोनों को होगा फायदा

    BMW ग्रुप इंडिया के प्रेसिडेंट और सीईओ हरदीप सिंह बरार ने कहा, ‘हमें विश्वास है कि भारत-ईयू एफटीए डील दोनों पक्षों को फायदा पहुंचाएगी और व्यापार भी बढ़ाएगी। साथ ही इससे टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का भी आदान-प्रदान होगा। एक-दूसरे की ताकत का इस्तेमाल करके यह भारत में लग्जरी वाहनों की खपत को बढ़ाएगी। सप्लाई-चेन इंटीग्रेशन में भी सुधार होगा।’

    कैसा है भारत का ईवी मार्केट?

    भारत में लग्जरी ईवी सेगमेंट में फिलहाल सालाना करीब 2000 यूनिट्स की बिक्री होती है। Jato Dynamics के डेटा के अनुसार जनवरी से नवंबर 2025 के बीच लग्जरी सेगमेंट में बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों का हिस्सा 10.7% था, जबकि मास-मार्केट निर्माताओं के लिए यह 4.5% था।

    हालांकि अभी भी आम बाजार में इंटरनल कम्बशन इंजन (पेट्रोल-डीजल इंजन) वाली कारें ज्यादा बिकती हैं, लेकिन लग्जरी ब्रांड्स ने हाइब्रिड कारों पर ज्यादा ध्यान दिया है। ये कारें माइल्ड हाइब्रिड से लेकर प्लग-इन हाइब्रिड तक हैं, जो फुल इलेक्ट्रिक होने की ओर एक कदम हैं।

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