इस ढांचे को अमेरिका-भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते ( US-India Bilateral Trade Agreement – BTA) की दिशा में एक कदम बताया जा रहा है। इस पर फरवरी 2025 में बातचीत शुरू हुई थी। अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार को संतुलित बनाएगा और सप्लाई चेन को ज्यादा सुरक्षित करेगा।
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भारत की तरफ से टैरिफ में कटौती
- इस अंतरिम समझौते के तहत भारत ने कई अहम कदम उठाने का वादा किया है। भारत अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों पर लगने वाले टैरिफ को खत्म करेगा या कम करेगा।
- अमेरिका के कई तरह के कृषि और फूड प्रोडक्ट पर भी शुल्क घटाया जाएगा। इनमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs), पशुओं के चारे के लिए लाल ज्वार, मेवे, फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट शामिल हैं।
- भारत कुछ खास क्षेत्रों में अमेरिकी सामानों को बाजार में आसानी से पहुंचने देगा, जिससे व्यापार सुगम होगा।
अमेरिका की तरफ से टैरिफ में बदलाव
- अमेरिका भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ घटाकर 18% कर देगा। यह टैरिफ ज्यादातर भारतीय सामानों पर लागू होगा।
- इस टैरिफ में आने वाले सामान में टेक्सटाइल, कपड़े, चमड़े के उत्पाद, जूते, प्लास्टिक, रबर, ऑर्गेनिक केमिकल, घर सजाने का सामान, हस्तशिल्प उत्पाद और कुछ मशीनरी शामिल हैं।
- साथ ही जेनेरिक दवाएं, रत्न और हीरे, और विमान के पुर्जे आदि में भी टैरिफ से राहत मिलेगी।
खास दर पर मिलेगा कोटा
इस समझौते में अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा नियमों से जुड़े टैरिफ का भी समाधान किया गया है। भारत से आने वाले विमानों और विमान के पुर्जों पर स्टील, एल्युमीनियम और तांबे से जुड़े कुछ ‘सेक्शन 232’ टैरिफ हटा दिए जाएंगे। भारत को ऑटो पार्ट्स के लिए एक खास दर पर कोटा मिलेगा। दवाओं पर लगने वाले टैरिफ की भी समीक्षा की जाएगी, जो अमेरिका के चल रहे ‘सेक्शन 232’ जांच के अनुसार होगा।
गैर-टैरिफ बाधाएं हटेंगी
- भारत उन पुरानी बाधाओं को भी दूर करने पर सहमत हुआ है जो अमेरिकी चिकित्सा उपकरणों, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) सामानों, और खाद्य व कृषि उत्पादों के आयात को प्रभावित करती हैं।
- अगले छह महीनों के भीतर, दोनों देश अहम क्षेत्रों में अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय मानकों और परीक्षण नियमों को स्वीकार करने पर बातचीत करेंगे। इससे व्यापार को आसान बनाने में मदद मिलेगी।
नियम, सुरक्षा उपाय और डिजिटल व्यापार
इस समझौते में यह सुनिश्चित करने के लिए नियम बनाए गए हैं कि इसका फायदा मुख्य रूप से भारत और अमेरिका के उत्पादकों को ही मिले। अगर कोई भी पक्ष अपने टैरिफ में बदलाव करता है, तो वह अपने वादों को भी बदल सकता है। दोनों देश डिजिटल व्यापार से जुड़ी मुश्किलों को दूर करने और पूर्ण BTA के तहत डिजिटल व्यापार के नियम बनाने पर भी काम करेंगे।
500 अरब डॉलर का सामान
भारत अगले 5 सालों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने की योजना बना रहा है। इसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और उसके पुर्जे, कीमती धातुएं, टेक्नोलॉजी उत्पाद और कोकिंग कोल शामिल हैं। इस समझौते का मकसद टेक्नोलॉजी व्यापार को भी बढ़ाना है, जिसमें ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPUs) और डेटा सेंटर उपकरण शामिल हैं।













