मूडीज ने कहा कि हाल के महीनों में भारत ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है। लेकिन, वे तुरंत पूरी तरह से खरीदना बंद नहीं करेंगे। ऐसा करने से भारत की आर्थिक वृद्धि में रुकावट आ सकती है। रेटिंग एजेंसी ने यह भी कहा कि अगर भारत पूरी तरह से गैर-रूसी तेल की ओर मुड़ता है, तो इससे दूसरी जगहों पर तेल की आपूर्ति कम हो सकती है। इससे तेल की कीमतें बढ़ेंगी और महंगाई भी बढ़ेगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है। यह दिखाता है कि भारत के लिए अपनी ऊर्जा आपूर्ति को जल्दी से बदलना कितना मुश्किल है।
India US Trade Deal: भारत के साथ टैरिफ के खेल में अमेरिका 18-0 से आगे! ट्रेड डील में क्या ट्रंप मार ले गए बाजी?
निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
ऊर्जा आयात पर अपनी राय देने के साथ-साथ, मूडीज ने कहा कि व्यापार समझौते के तहत अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ में कमी से भारत के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। खासकर अमेरिका को होने वाले निर्यात में वृद्धि होगी, क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा सामान निर्यात बाजार है।
मूडीज ने कहा कि अमेरिका द्वारा ज्यादातर भारतीय सामानों पर टैरिफ दर कम करने से अमेरिका को भारत के सामानों के निर्यात में फिर से जान आ जाएगी। अमेरिका अभी भी भारत का सबसे बड़ा सामान निर्यात बाजार है। साल 2025 के पहले ग्यारह महीनों में अमेरिका भारत के कुल सामान निर्यात का लगभग 21% हिस्सा था।
भारत क्या-क्या खरीदेगा अमेरिका से?
एक सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को रॉयटर्स को बताया कि भारत ने व्यापार समझौते के तहत अमेरिका से पेट्रोलियम, रक्षा सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, दूरसंचार उपकरण और विमानों की खरीद बढ़ाने पर सहमति जताई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को इस समझौते की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि वाशिंगटन भारतीय सामानों पर टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करेगा। इसके बदले में भारत रूसी तेल की खरीद बंद करेगा और व्यापार बाधाओं को कम करेगा। ट्रंप ने कहा था कि भारत ने ‘BUY AMERICAN’ (अमेरिकी खरीदें) को बहुत ऊंचे स्तर पर करने पर सहमति जताई है।













