भारत-अमेरिका ट्रेड डील से चीन को झटका
अमेरिका की ओर से फेंटानिल टैरिफ को 10% तक कम करने के बावजूद चीन के 99% निर्यात पर अमेरिका ने 37.5% या 55% टैरिफ लगा रखा है। सच तो यह है कि 70% से ज्यादा चीजें 55% टैरिफ के दायरे में हैं। इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पर तो यह करीब 130% है। जब अमेरिका ने भारत पर 25% टैरिफ लगाया था और 25% रूस से तेल खरीदने के नाम पर जुर्माने के तौर पर वसूल रहा था, तो भारत की स्थिति भी लगभग वही थी,जो अभी चीन की है। लेकिन, ट्रेड डील के ऐलान के बाद टैरिफ 18% होने के साथ ही परिस्थितियों ने पूरी तरह से करवट ले ली है।
भारत को चीन के मुकाबले 50% का फायदा
भारत-अमेरिका ट्रेड डील मात्र 18% टैरिफ तक ही सीमित नहीं है। ET की एक रिपोर्ट के अनुसार इस डील में भारत को कई और छूटें मिली हैं। इससे भारत को बहुत जबरदस्त फायदा होने वाला है। यही नहीं, ट्रेड डील के साथ ही भारत अमेरिकी बाजारों में सस्ते इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) भी बेच सकता है, जिससे चीन के पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई है। कुल मिलाकार ट्रेड डील के बाद चीन के मुकाबले अब भारत 50% फायदे में रहने जा रहा है।
एमएसएमई सेक्टर निकाल देगा चीन का तेल
भारत के नजरिए से फायदे की बात कर रहे हैं तो यह देखना भी जरूरी है कि हम अगर अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस में रहे हैं तो उनमें से सबसे बड़ा योगदान सभी सेक्टर के छोटे और मंझोले उद्यमों (MSME) का रहा है। भारत अपने कुल निर्यात का जो लगभग 20% अमेरिका भेजता है, उनमें से लगभग 60% माल एमएसएमई सेक्टर से ही जाता है। 50% अमेरिकी टैरिफ ने सबसे ज्यादा कहर इन्हीं उद्यमों पर बरपाया था। ट्रेड डील से इस क्षेत्र को न सिर्फ राहत मिली है, बल्कि कई चीजों पर टैरिफ को तो शून्य भी रखा गया है। यह ऐसा सेक्टर है, जिसपर चीन ने लगभग दुनिया में एकाधिकार बना रखा है। अब उसके हाथ से यह सेक्टर भी निकलने का खतरा मंडराने लगा है।
रेयर अर्थ मैग्नेट पर पहले ही लगा चीन को झटका
ट्रेड डील से पहले अमेरिका भारत को अपने क्रिटिकल मिनरल्स मुहिम का भी हिस्सा बना चुका है। इसको लेकर इसी हफ्ते वॉशिंगटन में 50 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक भी होने वाली है। कूटनीतिक तौर पर यह मुहिम चीन को पहले से ही टेंशन में डाल रखा है, जिसने लगभग साल भर से इसकी सप्लाई चेन को अपनी मर्जी के मुताबिक पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है। भारत के लिए परमानेंट मैग्नेट के लिए विकल्प तैयार करना रणनीतिक प्राथमिकता बन चुकी है, जिसके पास अभी मात्र 3% रेयर अर्थ मैग्नेट का बाजार है।













