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  • Iran Israel US war: ईरान-इजरायल युद्ध के बीच कहां फंस गया भारत, क्या है विकल्प

    नई दिल्ली: ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका की ओर से युद्ध शुरू होने के बाद भारत के सामने बहुत ही कठिन कूटनीतिक चुनौती खड़ी हो चुकी है। भारत और इजरायल बेहद करीबी मित्र हैं, तो ईरान के साथ भी भारत के पुराने रिश्ते हैं और वह भारत के लिए सामरिक और आर्थिक रूप से


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    By Azad Hind Desk फरवरी 28, 2026
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    नई दिल्ली: ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका की ओर से युद्ध शुरू होने के बाद भारत के सामने बहुत ही कठिन कूटनीतिक चुनौती खड़ी हो चुकी है। भारत और इजरायल बेहद करीबी मित्र हैं, तो ईरान के साथ भी भारत के पुराने रिश्ते हैं और वह भारत के लिए सामरिक और आर्थिक रूप से भी बहुत ज्यादा अहमियत रखता है। इस लड़ाई में अमेरिका का इजरायल का साथ देने की वजह से भारत के सामने और भी अग्निपरीक्षा की स्थिति पैदा हो चुकी है।

    ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के मायने

    ईरान पर शनिवार (28 फरवरी, 2026) को जिस तरह से अमेरिका और इजरायल ने मिलकर हमला बोला है, उसकी आशंका बीते कई महीनों से थी। पिछले कुछ हफ्तों से तो अमेरिका ने इसके लिए अपना पूरा सैन्य बंदोबस्त भी कर लिया था। लेकिन, अब जंग की शुरुआत हो चुकी है और जिस तरह से कुछ देश ईरान के समर्थन में भी खुलकर सामने आने शुरू हुए हैं, इससे आने वाले अगले कुछ दिन जियोपॉलिटिक्स के लिए बहुत अहम होने वाले हैं।

    रूस ने तो खुलकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर उंगली भी उठा दी है। हालांकि, वह सीधे इस जंग में ईरान की ओर से कूदेगा, फिलहाल ऐसे कोई संकेत नहीं हैं। लेकिन, पहले से ही आफत में अवसर की तलाश में बैठा चीन इसका किस तरह से फायदा उठाना चाहेगा, यह देखने वाली बात है।

    भारतीयों के लिए जारी हुई एडवाइजरी

    ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध पर भारत ने शुरुआती प्रतिक्रिया में दोनों देशों में रह रहे अपने नागरिकों को पूर्ण एहतियात बरतने की एडवाइजरी जारी की है। तेहरान में भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों को सलाह दी है, ‘पैदा हो रहे हालातों को देखते हुए, ईरान में सभी भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि पूरी सावधानी बरतें, गैर-जरूरी मूवमेंट से बचें और जितना संभव हो घरों के अंदर ही रहें। भारतीय समाचार पर नजर रख सकते हैं, जागरूकता बनाए रखें और भारतीय दूतावास से अगले दिशा-निर्देशों का इंतजार करें।’

    भारतीयों को हालात पर नजर रखने की सलाह

    वहीं इजरायल में तेल अवीव में भी भारतीय दूतावास से इसी तरह की अलग से एडवाइजरी दी गई है, ‘क्षेत्र में पैदा हुई सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए इजरायल में मौजूद सभी भारतीयों को सलाह दी जाती है कि पूर्ण सावधानी बरतें और हमेशा चौकन्ना रहें।’ दूतावास ने भारतीयों से कहा है कि इजरायली प्रशासन की ओर से जारी सभी सुरक्षा निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।

    भारत के हित इजरायल और ईरान दोनों से जुड़े

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करीब-करीब मौजूदा हालातों में ही इजरायल का दौरा करके आए हैं, जिस दौरान दोनों देशों के बीच अनेकों रक्षा, तकनीकी और आर्थिक समझौते हुए हैं। ऐसे में इजरायल और भारत की दोस्ती की अहमियत समझी जा सकती है। इसी तरह से ईरान के चाबहार पोर्ट के विकास पर भारत ने अपना खून-पसीना ही नहीं लगा रखा है, बल्कि पानी की तरह पैसे भी बहा रखे हैं, ताकि इसे अपनी सामरिक चुनौतियों से निपटने में आसानी हो और विश्व व्यापार में भी यह सहायक बने।

    भारत का ईरान-इजरायल संघर्ष पर क्या है स्टैंड

    ऐसे में भारत के लिए इस जंग में किसी एक पक्ष के साथ खुलकर खड़ा होना आसान नहीं है। पिछले साल जून में भी इजरायल ने ईरान के कई ठिकानों और सैन्य अड्डों को निशाना बनाना शुरू किया था। तब 13 जून, 2025 को भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा था कि ईरान और इजरायल के बीच हुई हालिया घटनाएं बहुत ही चिंताजनक हैं।

    इस बयान में कहा गया था, ‘भारत दोनों पक्षों से किसी भी तरह से तनाव बढ़ाने वाले कदमों से बचने की अपील करता है। बातचीत और डिप्लोमेसी से हालात को शांत करने की कोशिश होनी चाहिए। भारत के दोनों देशों के साथ नजदीकी और मैत्रिक संबंध हैं और यह हर संभव सहायता के लिए तैयार है।’

    ईरान-इजरायल युद्ध से भारत पर प्रभाव

    कुल मिलाकर भारत की रणनीति दोनों देशों के बीच संतुलन बनाकर चलने वाली रही है। पिछले अनुभवों से यही लगता है कि भारत अभी भी हर स्थिति में यही कोशिश करेगा कि यह युद्ध किसी भी सूरत में भयावह शक्ल न अख्तियार करे। क्योंकि-

    • लड़ाई लंबी खिंचने पर भारत पर खुद भी आर्थिक दबाव बढ़ने का खतरा है।
    • जानकारों ने आशंका जताई है कि युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने की आशंका है, जो कि भारतीय बाजार के लिए बहुत बड़ा जोखिम है।
    • मनी कंट्रोल के अनुसार एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा, ‘भारत के लिए जो कि एक बड़ा तेल आयातक है, इसके दाम बढ़ने से पहले ही जोखिम से गुजर रही मैक्रोइकोनॉमिक में और भी तनाव पैदा हो सकती है।’

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