भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। साथ ही भारत तेल का बड़ा उपभोक्ता भी है। जनवरी के आंकड़ों के अनुसार भारत रोजाना करीब 27.4 लाख बैरल कच्चा तेल मीडिल ईस्ट से आयात कर रहा था, जो उसके कुल आयात का लगभग 55% है। करीब 50% भारतीय कच्चा तेल आयात होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है। इस रास्ते से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा तेज गुजरता है।
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चीन के पास कितने दिन का तेल भंडार
- रॉयटर्स के अनुसार चीन के पास कम से कम छह महीने का कच्चा तेल भंडार मौजूद है। इसके मुकाबले भारत का स्टॉक काफी कम है।
- एनर्जी रिसर्च ग्रुप ICIS के एनर्जी एंड रिफाइनिंग डायरेक्टर अजय परमार के अनुसार, चीन के पास भंडारण में कम से कम छह महीने की आपूर्ति है, जबकि भारत का इन्वेंटरी स्तर काफी कम है, जिससे मौजूदा स्थिति में भारत अधिक संवेदनशील है।
भारत के पास कितने दिन का स्टॉक?
- पिछले महीने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि भारत के पास लगभग 74 दिनों की मांग पूरी करने लायक कच्चे तेल और ईंधन का भंडार है।
- वहीं केप्लर के मुताबिक भारत के पास 40 से 45 दिन का तेल भंडार है। केप्लर का कहना है कि रिफाइंड प्रोडक्ट (डीजल, पेट्रोल आदि) के अतिरिक्त स्टॉक से यह समय कुछ और बढ़ सकता है।
क्या है सरकार का प्लान?
अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और तेल की आपूर्ति बाधित होती है तो इसके लिए भी सरकार ने प्लान बना रखा है। तेल मंत्रालय ने कहा है कि सरकार उचित कीमतों पर ईंधन उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी। यानी भारत दूसरे देशों से तेल खरीद बढ़ा सकता है।
भारत के पास क्या विकल्प?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो भारत पश्चिम अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, अमेरिका और रूस से अतिरिक्त आपूर्ति ले सकता है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर अनिश्चितता के कारण भारत-अमेरिका तेल समझौता फिलहाल अधर में है। विश्लेषकों का कहना है कि अरब सागर में तैर रहे रूसी कार्गो को भी जरूरत पड़ने पर भारत अपनी तरफ बुला सकता है।














