• National
  • Iran News: ईरान में MBBS की पढ़ाई या इस्लाम की शिक्षा…क्यों जाते हैं कश्मीर और बाराबंकी के युवा

    नई दिल्ली: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई देश छोड़कर भाग सकते हैं। देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच खामेनेई पर सत्ता छोड़ने का दबाव बढ़ गया है। एक चौंकाने वाला खुलासे में ब्रिटिश अखबार द टाइम्स ने खुफिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया है कि ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई देश


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 6, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    नई दिल्ली: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई देश छोड़कर भाग सकते हैं। देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच खामेनेई पर सत्ता छोड़ने का दबाव बढ़ गया है। एक चौंकाने वाला खुलासे में ब्रिटिश अखबार द टाइम्स ने खुफिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया है कि ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई देश छोड़कर रूस की राजधानी मॉस्को भाग सकते हैं। ईरान के विरोध प्रदर्शन को अमेरिका हवा दे रहा है। ईरान में बड़ी संख्या में भारतीय भी रहते हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। सरकार ने भारतीयों को अगली सूचना तक ईरान की सभी गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की भी सलाह दी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 तक ईरान में लगभग 1500 भारतीय स्टूडेंट्स मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे। मेडिकल के अलावा वहां ऐसे भारतीय स्टूडेंट्स भी हैं जो धार्मिक शिक्षा के लिए जाते हैं। कश्मीर को ‘ईरान-ए-सगीर’ (छोटा ईरान) भी कहा जाता रहा है। यहां की संस्कृति व भाषा (फारसी) का ईरान से गहरा नाता रहा है। आजादी के बाद से भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध स्थापित किए।

    तेहरान, कुम और शीराज किसलिए चर्चित

    ईरान के तेहरान, क़ुम और शीराज जैसे शहरों का नाम प्राचीन काल से ही विख्यात रहा है। एक समय यहां का कुम शहर इराके नजफ के बाद इस्लाम के शिया समुदाय की शिक्षा का प्रमुख केंद्र माना जाता था। मगर, इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन शासन के पतन के बाद अब ईरान दुनियाभर के शिया मुसलमानों के लिए धार्मिक शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। हालांकि, नजफ और सीरिया के दमिश्क शहरों में भी छात्र धार्मिक शिक्षा लेते रहे हैं। ईरान में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। इनमें कुछ तो मेडिकल शिक्षा और ज्यादातर धार्मिक शिक्षा लेने के लिए ईरान जाते हैं। भारत और ईरान के बीच प्राचीन काल से ही सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध रहा है।

    ईरान क्यों जाते हैं भारतीय युवा

    कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय मुख्य रूप से ईरान के प्राचीन इतिहास और संस्कृति को देखने के लिए जाते हैं। ईरान के गोलेस्टन पैलेस, नागश-ए जहान स्क्वायर, इमाम मस्जिद और यज्द के प्राचीन शहर जैसे यूनेस्को स्थल देखने जाते हैं। भारतीय छात्र एमबीबीएस या बीडीएस यानी डेंटल जैसे कई तरह के कोर्स की पढ़ाई करने के लिए भी जाते हैं। ईरान ने भारत पिस्ता, केसर और खजूर भी मंगाता है। कई तरह की धार्मिक यात्राओं और शिक्षाओं के लिए भी भारतीय ईरान जाते हैं, जहां वे इस्फहान, कुम, शीराज, यज्द और तेहरान जैसी जगहों पर ऐतिहासिक स्थलों, बाजारों और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव करते हैं।

    तेहरान से 150 किमी दूर कुम शिया शिक्षा का केंद्र

    बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में जो भारतीय छात्र धार्मिक शिक्षा के मकसद से जाते हैं, उन्हें कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं। उनकी पूरी पढ़ाई का ख़र्चा ईरानी सरकार उठाती है। तेहरान से लगभग 150 किलोमीटर दूर स्थित कुम शहर धार्मिक शिक्षा का एक बड़ा केंद्र है। यहां पांच से छह प्रमुख मदरसे हैं, जिनमें आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ धार्मिक शिक्षाएं भी दी जाती हैं।

    ईरान में MBBS की फीस 15-30 लाख, बांग्लादेश का आधा

    ईरान में वजीफा भी ठीक-ठाक मिलता है, इसी वजह से भारत के छात्र बड़ी संख्या में ईरान जाते हैं। विदेश में शिक्षा दिलाने वाली एजेंसियों के मुताबिक, ईरान में फीस बाकी देशों के मुकाबले काफी कम है। ईरान में छह साल की एमबीबीएस की कुल फीस तकरीबन 15 से 30 लाख रुपये है, जबकि बांग्लादेश में यह फीस दोगुनी यानी लगभग 60 लाख रुपये तक बैठती है।

    ईरान जाते हैं कश्मीरी और बाराबंकी के छात्र

    कश्मीर के छात्र-छात्राओं के ईरान जाने की एक बड़ी वजह कम फीस के साथ-साथ वहां का रहन-सहन और मौसम भी है, जो उन्हें अपने घर जैसा महसूस कराता है। ईरान में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए प्रमुख यूनिवर्सिटीज में तेहरान स्थित ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, इस्लामिक आजाद यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज, शाहिद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी और केरमान यूनिवर्सिटी शामिल हैं। पढ़ाई करने लिए बाराबंकी से और दूसरे इलाकों के भारतीय छात्र ईरान जाते हैं। बाराबंकी का एक नाता ईरान के सुप्रीम लीडर से भी जुड़ता है, जिनके पूर्वज यहीं से गए थे।

    ईरान को किन चीजों का होता है भारत से निर्यात

    भारत से ईरान को चावल खासकर बासमती चावल, चाय, चीनी, केले और मौसमी फल, मसाले भेजे जाते हैं। वहीं, खेती और उद्योग से जुड़े उपकरण, लोहा-स्टील, फार्मास्यूटिकल्स, फर्टिलाइजर, टेक्स्टाइल, रबर प्रोडॅक्ट वगैरह भेजे जाते हैं।

    ईरान से भारत क्या खरीदता है

    भारत ईरान से क्रूड ऑयल खरीदता रहा है, जिसमें अमेरिकी पाबंदी के चलते काफी उतार-चढ़ाव भी रहा है। वहीं, इंडस्ट्री यूज के लिए एसाइक्लिक अल्कोहल, पेट्रोलियम कोक, बादाम-पिस्ता जैसे मेवे, खजूर और केसर मंगाए जाते हैं।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।