ट्रंप की धमकी पर ईरान ने पलटवार किया है और हमला होने की स्थिति में अंजाम भुगतने की धमकी दी है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि “उम्मीद है कि ईरान जल्दी ही ‘बातचीत की टेबल पर आएगा’ और एक निष्पक्ष और सही डील करेगा, कोई न्यूक्लियर हथियार नहीं, एक ऐसी डील जो सभी पक्षों के लिए अच्छी हो। ईरान के हाथ से समय भाग रहा है और ये वास्तव में बहुत जरूरी है।” ट्रंप ने साफ शब्दों में लिखा है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते हैं।
ईरान पर हमले के लिए बहाने बनाते डोनाल्ड ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने जून 2025 में ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हुए पिछले अमेरिकी और इजरायली हमलों का जिक्र किया है। उन्होंने तेहरान को पिछले हमले के बारे में याद दिलाने की कोशिश की। लेकिन जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट स्टेनली जॉनी ने लिखा है कि डोनाल्ड ट्रंप बार बार गोलपोस्ट बदल रहे हैं। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों को डिकोड करते हुए लिखा है कि “अगर आप ईरान पर ट्रंप की पोस्ट को ध्यान से पढ़ेंगे, तो आपको समझ आएगा कि अमेरिका की असली चिंता क्या है।”
उन्होंने लिखा है कि “अब तक ट्रंप प्रदर्शनकारियों की बात कर रहे थे। लेकिन आज उन्होंने कहा कि ईरान के पास न्यूक्लियर डील करने के लिए समय कम है। उन्होंने लिखा, “कोई न्यूक्लियर हथियार नहीं”। अगर आपको याद हो तो 22 जून को ईरान पर हमले के बाद ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को “खत्म” कर दिया है। जून की जंग के बाद उन्होंने बार बार दावा किया कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम बंद हो गया है। ईरान ने IAEA को बमबारी वाली जगहों तक जाने से मना कर दिया था।”
उन्होंने लिखा है कि “अगर ट्रंप ने जून 2025 में ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म कर दिया था, तो वह जनवरी 2026 में न्यूक्लियर डील क्यों चाहते हैं? यही असली मुद्दा है, न कि लोकतंत्र और मानवाधिकार।” ट्रंप ने एक और पोस्ट में लिखा है कि “अगला हमला बहुत ज्यादा बुरा होगा और ऐसा नहीं होने दें। अमेरिकी अर्मांडा (सेना) ईरान की तरफ बढ़ रही है।” यानि ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर ईरान, घुटने पर नहीं आता है, डोनाल्ड ट्रंप के सामने सरेंडर नहीं करता है, तो अमेरिका तमाम वैश्विक नियम कायदों को लात मारते हुए इस्लामिक देश पर हमला करेंगे।
अमेरिकी हमले के खिलाफ ईरान की प्रतिक्रिया कैसी होगी?
ईरान भी अब आरपार के मूड में है। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के सलाहकार अली शामखानी ने बुधवार को X पर एक पोस्ट में कहा कि “अमेरिका की किसी भी मिलिट्री कार्रवाई का नतीजा यह होगा कि ईरान अमेरिका, इजरायल और उनका साथ देने वालों को निशाना बनाएगा।” ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने भी X पर चेतावनी दी कि “ईरान की सेना किसी भी हमले का तुरंत और जोरदार जवाब देने के लिए तैयार है, उनकी उंगलियां ट्रिगर पर हैं।”
अराकची ने आगे लिखा कि “साथ ही, ईरान ने हमेशा एक आपसी फायदेमंद, निष्पक्ष और बराबरी के परमाणु समझौते का स्वागत किया है, बराबरी के आधार पर और जबरदस्ती, धमकियों और डराने-धमकाने के खिलाफ, जो ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु टेक्नोलॉजी के अधिकारों को सुनिश्चित करता है और किसी भी परमाणु हथियार की गारंटी नहीं देता है।” ईरानी स्टेट मीडिया ने बुधवार को बताया है कि विदेश मंत्री अराकी ने पहले कहा था कि हाल के दिनों में उनका अमेरिकी स्पेशल एनवॉय स्टीव विटकॉफ से कोई संपर्क नहीं हुआ है और न ही उन्होंने बातचीत का अनुरोध किया है।
यानि, ईरान और अमेरिका के बातचीत चल रही है, इसके कोई सार्वजनिक संकेत नहीं हैं। अगर पर्दे के पीछे कोई बात चल रही है तो अलग बात है, लेकिन ऊपर से देखने पर लग रहा है कि ईरान घुटने नहीं टेकेगा और डोनाल्ड ट्रंप हमला करने का आदेश दे सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन के नेतृत्व वाला एक अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है। दो अमेरिकी अधिकारियों ने सोमवार को रॉयटर्स को बताया कि लिंकन और सहायक युद्धपोत मिडिल ईस्ट पहुंच गए हैं। इस ग्रुप में टॉमहॉक लैंड-अटैक क्रूज मिसाइलों से लैस डिस्ट्रॉयर भी शामिल हैं और आमतौर पर इसके साथ एक परमाणु-संचालित पनडुब्बी भी होती है, जो उन्हीं हथियारों से लैस होती है।













