खामेनेई ने क्या आरोप लगाया
एक धार्मिक अवसर पर दिए गए भाषण में खामेनेई ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने ईरान में अशांति फैलाने की योजना बनाई थी, ताकि वह ईरान को अपने नियंत्रण में ले सके। ईरान में 28 दिसंबर को आर्थिक संकट को लेकर प्रदर्शन की शुरुआत हुई थी, लेकिन जल्द यह देशव्यापी आंदोलन में बदल गया। प्रदर्शनकारियों ने ईरान में मौलवी शासन को खत्म करने की मांग की थी। इसे ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से सबसे घातक विरोध प्रदर्शन माना जा रहा है।
ट्रंप को बताया था मौतों के लिए जिम्मेदार
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान में हाल के दंगों में हुई हत्याओं और तबाही के लिए जिम्मेदार अपराधी बताया। खामेनेई के अनुसार ट्रंप ने खुले तौर पर बयान दिए, दंगाइयों का समर्थन किया और यहां तक कि सैन्य मदद देने की बात भी कही। खामेनेई ने स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन देश के भीतर और बाहर अशांति फैलाने वालों को सज़ा देने से पीछे भी नहीं हटेगा।
ईरान में 3000 लोग हिरासत में
यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान में कई हफ्तों से चल रहे विरोध प्रदर्शन अब कम होते नजर आ रहे हैं। ये प्रदर्शन दिसंबर के अंत में आर्थिक समस्याओं के कारण शुरू हुए थे, लेकिन बाद में हिंसक हो गए। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को असामाजिक तत्वों ने हिंसा में बदल दिया। अर्ध-सरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी ने शुक्रवार को बताया कि सुरक्षा बलों ने अशांति के सिलसिले में लगभग 3,000 लोगों को हिरासत में लिया है। स्थिति में सुधार के बाद शनिवार से मोबाइल संदेश सेवा फिर शुरू कर दी गई है। ईरानी मीडिया के अनुसार, एक सप्ताह बंद रहने के बाद रविवार से स्कूल भी दोबारा खुलेंगे।
हिजबुल्लाह ने ईरान को दिया समर्थन
इसी दिन लेबनान के हिजबुल्लाह ने ईरान के समर्थन का ऐलान किया। हिजबुल्लाह के नियंत्रण वाले अल-मनार चैनल पर एक टेलीविजन संबोधन में समूह के नेता नईम कासिम ने ईरान को प्रतिरोध की मजबूत ताकत बताया और अमेरिका पर दुनिया पर प्रभुत्व जमाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उधर, ईरान के विदेश मंत्रालय ने ग्रुप ऑफ सेवन देशों की “दखलंदाजी वाली” टिप्पणियों की कड़ी निंदा की। मंत्रालय ने कहा कि ये बयान ईरान के आंतरिक मामलों में दखल हैं और जी-सेवन को ऐसा करना बंद करना चाहिए।












