ईरान में मौतों की संख्या कहां तक पहुंची
ईरान इंटरनेशनल का आंकड़ा अब तक रिपोर्ट किए गए आंकड़ों से कहीं ज्यादा है। मानवाधिकार समूहों और मीडिया आउटलेट्स ने पुष्टि की गई मौतों की संख्या काफी कम बताई है। हालांकि, यह भी कहा है कि ईरान के अंदर इंटरनेट ब्लॉकेज और मीडिया पर पाबंदियों के कारण इनका स्वतंत्र सत्यापन करना मुश्किल बना हुआ है। ईरान इंटरनेशनल का कहना है कि इनमें ज्यादातर मौतें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और बासिज फोर्सेज की गोलीबारी में मुख्य रूपसे 8 और 9 जनवरी की रातों को हुई हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि फायरिंग जानबूझकर की गई, जिसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को मारना था।
IRGC की फायरिंग में अधिकतर मौतें
इस आउटलेट ने यह भी दावा किया है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और बासिज फोर्सेज ने यह गोलीबारी सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के आदेश पर किया। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने सीधा गोली मारने की अनुमति देने वाला आदेश जारी किया था। ईरान इंटरनेशनल ने कहा कि कम से कम 12,000 मौतों का उसका अनुमान ईरान के अपने सुरक्षा संस्थानों के पास मौजूद आंकड़ों से लिया गया है। उसने यह भी कहा गया है कि आंकड़े को कई स्रोतों की मदद से जुटाया गया है और क्रॉस-चेक किया गया है।
प्रदर्शन पर अमेरिका से बात करेगा ईरान?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई को लेकर ईरान पर हमले की उनकी चेतावनी के बाद तेहरान वाशिंगटन के साथ बातचीत करना चाहता है। ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब अधिकार कार्यकर्ताओं ने सोमवार को कहा कि ईरान में महंगाई और मुद्रा अवमूल्यन को लेकर देशव्यापी प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 599 हो गई है। हालांकि, ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति की टिप्पणी पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त की है। उनकी यह टिप्पणी ओमान के विदेश मंत्री की सप्ताहांत में हुई ईरान यात्रा के बाद आई है, जो लंबे समय से वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका में रहे हैं।












