जियो टीवी के मुताबिक, ख्वाजा आसिफ ने सोमवार को कहा कि पाकिस्तान-सऊदी अरब रक्षा समझौते का विस्तार हो सकता है। इसमें दूसरे देशों के शामिल करने का रास्ता खुला है। समझौते में नए देशों की एंट्री पर पाकिस्तान और सऊदी अरब को मिलकर फैसला करेंगे। पाकिस्तान और सऊदी अरब तैयार होते हैं तो तुर्की या दूसरे देश रक्षा समझौते का हिस्सा बन सकते हैं।’
मुस्लिम दुनिया में एकता जरूरी है: आसिफ
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि मुस्लिम देशों को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक सामूहिक रक्षा ढांचे की दिशा में काम करना चाहिए। इससे मुस्लिम देशों को एक-एक करके व्यवस्थित रूप से कमजोर या अक्षम होने से रोका जा सकेगा। इस दौरान उन्होंने इजरायल का नाम लेते हुए कहा कि ये एक ऐसा देश है, जिसे कई मुल्क खतरा मानते हैं।
ख्वाजा आसिफ से पहले पाकिस्तान के एक और मंत्री रजा हयात हिराज की ओर से इस्लामिक नाटो जैसे गठबंधन की संभावना पर बयान दिया जा चुका है। हिराज ने बीते हफ्ते कहा था कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के रक्षा समझौते में तुर्की का आना तकरीबन तय हो गया है। तीनों देशों ने एक साल की बातचीत के बाद डील का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है।
इस्लामिक नाटो की चर्चा क्यों
सऊदी अरब और पाकिस्तान ने बीते साल स्ट्रेटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट (SMDA) किया था। इस समझौते में नाटो जैसा प्रावधान है, जिसमें एक देश पर हमले को दोनों देशों पर हमला माना जाता है। चर्चा है कि इस डील में तुर्की भी शामिल हो सकता है। तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी जैसे देशों के बीच सैन्य गठबंधन की संभावना ने ‘इस्लामिक नाटो’ के विचार को चर्चा में ला दिया है।
कई रिपोर्ट ये संकेत देती हैं कि तुर्की की सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ रक्षा फ्रेमवर्क में शामिल होने की बातचीत एडवांस स्टेज में है। तुर्की इसमें आया तो तीनों देश नाटो आर्टिकल-5 जैसे सामूहिक रक्षा क्लॉज से बंध जाएंगे। दुनिया की नजर इस पर लगी हुई है क्योंकि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की मिल जाते हैं तो यह एक मजबूत सैन्य और आर्थिक ताकत वाला गुट बनेगा।














