भारत ने इजरायल को चुना प्रमुख भागीदार देश
द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार, एसबीआई इजरायल के सीईओ वी मणिवन्नन के मुताबिक, भारत के सहयोगी देशों से होने वाले महत्वपूर्ण व्यापार और वैश्विक व्यापार समुदाय में भारतीय रुपये में व्यापार करने की रुचि बढ़ी है। ऐसे में हमारे बैंकिंग नियामक भारतीय रिजर्व बैंक ने भारतीय बैंकों को अपने कॉर्पोरेट ग्राहकों के निर्यात और आयात का निपटान भारतीय रुपये में करने की अनुमति देने का निर्णय लिया है। इस व्यवस्था के तहत इजरायल को भागीदार देशों में से एक के रूप में चुना गया है।
इजरायली संस्थाओं के लिए रुपये में पेमेंट आसान
एसबीआई के कार्यकारी ने कहा कि इस व्यवस्था के माध्यम से निर्यात-आयात करने वाली इजरायली संस्थाएं भारतीय रुपये में पेमेंट लेंगी और करेंगी। इसे इजरायली विक्रेता या खरीदार से माल या सेवाओं की आपूर्ति या खरीद के चालान के बदले विशेष रुपी वोस्त्रो खाते (SRVA) में जमा किया जाएगा। तेल अवीव के पास स्थित एसबीआई इन लेन-देन को सुगम बनाने के लिए सभी जरूरी मंजूरी दे चुका है।
इजरायल में 40 हजार से ज्यादा भारतीय कामगार
द हिंदू पर छपी खबर में कहा गया है कि हाल ही में 40,000 से अधिक भारतीय कामगारों के इजरायली कार्यबल में शामिल होने के साथ, एसबीआई तेल अवीव शाखा में भारत में उनके एनआरआई खाते खोलने की सुविधा प्रदान करके भारत में प्रेषण के प्रवाह को सुगम बनाने का भी प्रयास कर रहा है। मणिवन्नन ने कहा-इजरायल के श्रम बाजार में भारतीय कामगारों की भारी आमद हुई है। खासकर निर्माण और कृषि क्षेत्र में। अब भारतीय प्रवासियों को भारत में एनआरआई खाता सुविधा से जोड़कर और उनके भारतीय रुपये के भेजना आसान बना रहा है। एसबीआई ने 2007 में इजरायल में अपनी शाखा खोली।
भारत-इजरायल में और बढ़ेगा आर्थिक सहयोग
रुपये में व्यापार को बढ़ावा देने का यह प्रयास ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देश आर्थिक सहयोग की पूरी क्षमता का एहसास करने के लिए प्रयासरत हैं। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के नवंबर में इजरायल दौरे के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दिसंबर में इजरायल का दौरा किया। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी पिछले महीने अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी से बात की और दोनों नेताओं ने बहुत जल्द मिलने पर सहमति जताई।
2026 में हो सकती है भारत-इजरायल में बड़ी डील
भारत-इजरायल फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) अभी पूरी तरह से फाइनल नहीं हुआ है। हालांकि, नवंबर 2025 में टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) पर साइन करने के बाद 2025 के आखिर में बातचीत आधिकारिक तौर पर फिर से शुरू हुई। इसका मकसद व्यापार को बढ़ावा देना था, जिसमें शुरू में वस्तुओं और सेवाओं पर ध्यान दिया गया। ज्यादा मार्केट एक्सेस और निवेश के लिए एक व्यापक डील तक पहुंचने के लिए 2026 की शुरुआत में बातचीत जारी है।
इजरायल-भारत ने BIT पर किए हैं दस्तखत
इजरायल के पर्यटन मंत्री हैम काट्ज, अर्थव्यवस्था और उद्योग मंत्री नीर बरकत, कृषि और खाद्य सुरक्षा मंत्री एवी डिक्टर और वित्त मंत्री बेज़ेल स्मोट्रिच ने 2025 में भारत का दौरा किया, क्योंकि दोनों रणनीतिक साझेदार मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने की दिशा में गति बढ़ा रहे हैं। स्मोट्रिच की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर हस्ताक्षर किए और गोयल की इजरायल यात्रा के दौरान मुक्त व्यापार समझौते के लिए एक संदर्भ पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही भारत-अमेरिका में बात
10 जनवरी को जब ऑपरेशन सिंदूर थमा तो उसी दिन भारत सरकार ने अमेरिकी लॉबिस्टों के जरिये डोनाल्ड ट्रंप सरकार से संपर्क साधना शुरू कर दिया। यह संपर्क ट्रंप के साथ काम कर चुके और अमेरिका में भारत के आधिकारिक लॉबिस्ट जेसन मिलर के जरिये किया गया। इसके बाद भारत का फोकस अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर आ गया। यह जानकारी अमेरिका के विदेशी एजेंट्स रजिस्ट्रेशन अधिनियम (FARA यानी Foreign Agents Registration Act) के तहत की गई आधिकारिक फाइलिंग से सामने आई है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर हुई बातें
FARA के रिकॉर्ड्स के मुताबिक, जेसन मिलर की कंपनी SHW Partners LLC ने बीते साल अप्रैल से लेकर दिसंबर तक संबंधों को बेहतर बनाने में अमेरिका में भारतीय दूतावास की मदद की। इस दौरान ट्रेड डील को लेकर बातचीत हुई। भारतीय अधिकारियों की अमेरिकी विदेश विभाग और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की परिषद के साथ बैठकें कराई गईं। 2026 में भी यह बातचीत चल रही है, मगर भारत अपने किसानों का हित देखते हुए अमेरिकी कृषि उत्पादों और डेयरी प्रोडॅक्ट्स को भारत में खुली छूट नहीं देना चाहता है। जबकि, अमेरिका इसी बात पर अड़ा हुआ है।














