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  • ISRO का EOS-N1 सैटेलाइट मिशन अंतरिक्ष में रचेगा नया इतिहास? 12 जनवरी को भारत पर होंगी दुनिया की नजरें

    नई दिल्ली: भारत अंतरिक्ष में एक और बड़ी छलांग लगाने को तैयार है। देश का भरोसेमंद पीएसएलवी रॉकेट 12 जनवरी को सुबह 10:17 बजे EOS-N1 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में ले जाएगा। इस मिशन में 18 अन्य छोटे पेलोड भी शामिल होंगे, जो अलग-अलग देशों और संस्थानों के लिए हैं। यह लॉन्च भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम


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    By Azad Hind Desk जनवरी 6, 2026
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    नई दिल्ली: भारत अंतरिक्ष में एक और बड़ी छलांग लगाने को तैयार है। देश का भरोसेमंद पीएसएलवी रॉकेट 12 जनवरी को सुबह 10:17 बजे EOS-N1 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में ले जाएगा। इस मिशन में 18 अन्य छोटे पेलोड भी शामिल होंगे, जो अलग-अलग देशों और संस्थानों के लिए हैं।

    यह लॉन्च भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक बड़ा कदम है। EOS-N1 सैटेलाइट पृथ्वी का निरीक्षण करेगा और मौसम की जानकारी, आपदा प्रबंधन और कृषि जैसे क्षेत्रों में मदद करेगा। यह मिशन भारत की अंतरिक्ष कूटनीति को भी दिखाता है।

    पीएसएलवी, यानी पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल, भारत का एक बहुत ही भरोसेमंद रॉकेट है। इसने पहले भी कई उपग्रहों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाया है। इस बार के मिशन में 18 सह-यात्री पेलोड भी भेजे जा रहे हैं। ये पेलोड अलग-अलग देशों और संस्थानों के लिए हैं। यह भारत की अंतरिक्ष कूटनीति का एक अच्छा उदाहरण है।

    साल 2026 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( ISRO ) ने एक बड़ी योजना बनाई है। इसरो मार्च 2026 तक सात मिशन पूरे करेगा। इसमें बिना क्रू वाले रोबोटिक टेस्ट और ग्रहों की खोज जैसे महत्वाकांक्षी मिशन शामिल हैं। यह इसरो के लिए किफायती इनोवेशन का एक शानदार उदाहरण होगा। इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा कि भारत एक क्षेत्रीय खिलाड़ी से एक प्रमुख वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति बनने की राह पर है। उन्होंने यह बात सफल LVM3-M6 मिशन के बाद कही। LVM3-M6 मिशन, लॉन्च व्हीकल मार्क-III की छठी ऑपरेशनल उड़ान थी।

    इसरो साल 2026 में अंतरिक्ष में कई महत्वपूर्ण काम करने वाला है। मार्च 2026 तक सात मिशन पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है। इन मिशनों में रोबोटिक टेस्ट भी शामिल हैं, जिनमें कोई इंसान नहीं होगा। साथ ही, ग्रहों की खोज जैसे बड़े मिशन भी होंगे। यह सब इसरो के लिए कम खर्च में नई चीजें करने का एक बेहतरीन मौका होगा।

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