सबसे अहम बात यह है कि रॉकेट फेल होने के बावजूद केआईडी ने करीब 190 सेकंड तक उड़ान का डेटा भेजा। आमतौर पर ऐसे हालात में किसी भी उपकरण से कोई डेटा नहीं मिल पाता। केआईडी को धरती के वातावरण में दोबारा प्रवेश के परीक्षण के लिए बनाया गया था।
15 सैटलाइट लापता
पीएसएलवी सी 62 ने सोमवार सुबह 10:18 बजे श्रीहरिकोटा से उड़ान भरी थी। रॉकेट में भारत का उपग्रह अन्वेषा समेत कुल 15 सैटलाइट और एक स्पेन का कैप्सूल था। रॉकेट के तीसरे चरण में खराबी आने से सैटलाइट लापता हो गए।
इसरो का PSLV-C62 रॉकेट तकनीकी खराबी के चलते रास्ता भटक गया। यह अपने साथ 16 सैटेलाइट और पेलोड लेकर जा रहा था। इस मिशन को भारत की राष्ट्रीय कूटनीतिक जरूरतों और अंतरिक्ष क्षेत्र में उसकी वैश्विक महत्वाकांक्षा, दोनों के लिए अहम माना जा रहा था। ऐसे में असफलता ने दोनों ही उद्देश्यों को नुकसान पहुंचाया है।
क्या बोले इसरो चीफ?
इसरो के अध्यक्ष वी नारायणन ने बताया कि उड़ान के तीसरे चरण के दौरान जब ‘स्ट्रैप-ऑन मोटर’ पीएसएलवी-सी62 को निर्धारित ऊंचाई तक ले जाने के लिए ‘थ्रस्ट’ प्रदान कर रहे थे, तब रॉकेट में गड़बड़ी आ गई और बाद में वह उड़ान पथ से विचलित हो गया। उन्होंने कहा कि रॉकेट में गड़बड़ी आने और उसके उड़ान पथ से भटकने के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत विश्लेषण शुरू कर दिया गया है।














