क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार, IUI और IVF आर्टिफिशियल फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के दो प्रमुख तरीके हैं, लेकिन दोनों की प्रक्रिया अलग होती है। IUI में फर्टिलाइजेशन महिला के शरीर के अंदर ही होता है,जबकिIVF में अंडाणु और शुक्राणु को शरीर के बाहर लैब में फर्टिलाइज किया जाता है।
क्या होता है आईयूआई ?
आईयूआई (IUI) का फुल फॉर्म इंट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन होता है। इस प्रक्रिया में महिला के ओव्यूलेशन (अंडा निकलने) के समय पार्टनर के शुक्राणुओं को एक पतली नली (कैथेटर) की मदद से सीधे गर्भाशय में डाला जाता है। इससे शुक्राणुओं को अंडाणु तक पहुंचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ती है, जो प्रेग्नेंसी की संभावना को बढ़ाती है।
आईवीएफ क्या होता है ?
आईवीएफ का फुल फॉर्म होता है इन विट्रो फर्टिलाइजेशन है। यह एक सहायक प्रजनन तकनीक है, जिसमे स्पर्म और एग को एक लैब में फर्टिलाइज कराया जाता है। फर्टिलाइजेशन के कुछ दिनों के बाद एग को, जिसे अब भ्रूण कहा जाता है, उसे गर्भाशय में रखा जाता है। इसके बाद, प्रेग्नेंसी फिर तब होती है, जब भ्रूण यूट्रस की दीवारों में स्थापित हो जाता है।
IUI और IVF में क्या अंतर है?
क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार, इंट्रा यूटेराइन इनसेमिनेशन (IUI) और इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) दोनों प्रक्रियाएं एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। IUI में फर्टिलाइजेशन महिला के शरीर के अंदर ही होता है। इस प्रक्रिया के लिए मेल पार्टनर के स्पर्म का एक सैंपल लिया जाता है और उसे विशेष तरीके से वॉश किया जाता है, ताकि बेहतर गुणवत्ता वाले शुक्राणु अलग किए जा सकें। इसके बाद ओव्यूलेशन के समय इन शुक्राणुओं को गर्भाशय में डाला जाता है। वहीं, IVF में अंडाणु और शुक्राणु को शरीर के बाहर लैब में फर्टिलाइज किया जाता है। फर्टिलाइजेशन के बाद तैयार हुए भ्रूण को महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है, जहां उसके स्थापित होने पर गर्भधारण संभव होता है।
आईयूआई और आईवीएफ प्रक्रिया में कितना समय लगता है?
यह एक सरल प्रक्रिया है, जो क्लीनिक में ही की जाती है और इस पूरे प्रोसेस में महज पांच से दस मिनट लगते हैं। आईवीएफ में चार से छह सप्ताह का समय लग जाता है, क्योंकि इसमे कई चरण शामिल होते हैं।
IUI की जरूरत कब पड़ती है ?
अमेरिकन प्रेग्नेंसी एसोसिएशनके मुताबिक, आईयूआई करवाने की सबसे आम वजहों में लो स्पर्म काउंट यानी शुक्राणुओं की कम संख्या और उनकी कम गतिशीलता (Low Motility) शामिल हैं। इसके अलावा, अनएक्सप्लेंड इंफर्टिलिटी (जब जांच में कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आता), वीर्यपात संबंधी विकार और गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) की समस्या में भी इस ट्रीटमेंट को कराने की सलाह दी जाती है।
किन महिलाओं को IUI कराने की सलाह नहीं दी जाती है ?
कुछ मेडिकल स्थितियां ऐसी भी होती हैं, जिनमें IUI करवाना ठीक नहीं माना जाता है। अमेरिकन प्रेग्नेंसी एसोसिएशन की जानकारी के अनुसार, जिन महिलाओं को गंभीर फैलोपियन ट्यूब की समस्या हो, पेल्विक इंफेक्शन का इतिहास रहा हो या जो मध्यम से गंभीर एंडोमेट्रियोसिस से प्रभावित हों, उनके लिए IUI की सलाह आमतौर पर नहीं दी जाती।
आईयूआई की सक्सेस रेट क्या है ?
इस ट्रीटमेंट की सफलता दर को देखें, तो अमेरिकन प्रेग्नेंसी एसोसिएशन के अनुसार, आईयूआई की सफलता कई बातों पर निर्भर करती है। अगर कोई कपल हर महीने यह प्रक्रिया करवाता है,तो हर साइकल में करीब 20% तक सफलता मिल सकती है। हालांकि, यह सक्सेस रेट महिला की उम्र, इनफर्टिलिटी की वजह और प्रजनन से जुड़ी दवाओं के इस्तेमाल पर भी निर्भर करता है।
IVF की जरूरत कब पड़ती है?
क्लीवलैंड क्लीनिक लेख के अनुसार, आईवीएफ की जरूरत उनक कपल्स को होती है, जो इनफर्टिलिटी से जूझ रहे हैं या फिर कपल्स में एक पार्टनर की हेल्थ कंडीशन अच्छी नहीं है, तो ऐसी परिस्थिति में आईवीएफ का सहारा लेते हैं। इसके अलावा, अधिक उम्र में माता या पिता बनने वाले शख्स भी इस तकनीक का सहारा लेते हैं।
इन कंडीशन में भी आईवीएफ का सहारा लेना पड़ता है
- फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक होना
- -एंडोमेट्रियोसिस
- स्पर्म काउंट कम होना
- यूट्रस में फाइब्रॉइड
- पीसीओएस या अन्य अंडाशय से संबंधित स्थितियां
- अगर आप सरोगेट मदर की मदद ले रहे हैं












